लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने व्यावसायिक वाहनों के बकाये टैक्स पर लगने वाली पेनाल्टी को शत-प्रतिशत माफ करने के लिए 'एकमुश्त शास्ति समाधान योजना 2022' की अधिसूचना सोमवार को जारी कर दी। इसके तहत एक अप्रैल 2020 को या उसके पहले पंजीकृत वाहनों के बकाये पर दंड की शत-प्रतिशत छूट अधिसूचना जारी होने की दिनांक से तीन माह तक के लिए प्रदान की गई है। इस योजना का लाभ 5.38 लाख वाहन मालिकों को मिलेगा।

उत्तर प्रदेश में विभिन्न श्रेणी के व्यावसायिक वाहनों के लिए कर जमा कराने की भिन्न-भिन्न व्यवस्था है। बसों का कर मासिक जमा होता है। चार पहिया टैक्सियों का त्रैमासिक व तिपहिया यात्री/माल वाहनों का वार्षिक कर जमा होता है। कई बार विभिन्न कारणों से व्यावसायिक वाहनों पर कर बकाया हो जाता है।

इसके अलावा व्यावसायिक वाहनों की आयु सीमा निर्धारण में एकरूपता न होने के कारण भी व्यावसायिक वाहन जब तक संचालन योग्य रहते हैं, तब तक संचालित होते रहते हैं। इस कारण कई बार नियमित कर जमा नहीं हो पाता है।

कई ऐसे भी वाहन हैं जो आयु अधिक हो जाने, अस्तित्वहीन हो जाने, संचालन योग्य न रह जाने, दुर्घटनाग्रस्त हो जाने आदि के बावजूद भी वाहनों का पंजीकरण कार्यालय में निरस्त न किए जाने से कंप्यूटर अभिलेखों में ऐसे वाहन अस्तित्व में प्रदर्शित हो रहे हैं। इनका बकाया अपने आप सृजित होता रहता है। ऐसे ही वाहनों के बकाये पर लगने वाली पेनाल्टी पर शत-प्रतिशत छूट प्रदान करने के लिए सरकार यह योजना लेकर लाई है।

परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव एल वेंकटेश्वर लू की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि इस योजना का लाभ लेने के लिए एक माह के भीतर आवेदन करना होगा। परिवहन आयुक्त इस अवधि को एक माह के लिए बढ़ा भी सकते हैं। आवेदन के साथ सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी के यहां एक हजार रुपये शुल्क भी देना होगा।

वाहन स्वामी को 30 दिन के अंदर बकाया धनराशि जमा करनी होगी। यदि वाहन स्वामी इसे किस्तों में जमा करना चाहता है तो उसे तीन किस्तों में जमा करने की छूट मिल जाएगी। पहली किस्त संपूर्ण बकाया का 50 प्रतिशत देना होगा। शेष धनराशि दो समान किस्तों में जमा की जाएगी।

बकाया राशि एक माह के अंदर जमा न करने पर 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से विलंब शुल्क देना पड़ेगा। इस योजना के तहत आवेदन प्रस्तुत होने के 10 दिनों के भीतर इसका निस्तारण करना अनिवार्य होगा।

Edited By: Umesh Tiwari