लखनऊ [पुलक त्रिपाठी]। कोरोना महामारी के दौरान आरबीआई ने ऋण लेने वाले ग्राहकों को राहत देने संबंधी घोषणा की थी, जिसे बैंकों ने स्पष्टता और गंभीरता के साथ अमल करना मुनासिब नहीं समझा। यही कारण है कि लोगों में इसे लेकर तमाम भ्रांतियां हैं। बैंक अधिकारी स्पष्ट नहीं कर रहे हैं कोरो ईएमआई में तीन महीने की राहत को किस रूप में और किन शर्तों के तहत मुहैया कराया जाएगा।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक हो या निजी क्षेत्र के ईएमआई जमा करने के लिए बैंको से बराबर मैसेज आ रहे है। खाते से पैसा काट लिया जा रहा है। इसके चलते बैंक ग्राहकों में न सिर्फ भ्रांति है बल्कि धीरे धीरे रोष भी पनपने लगा है।

यह है भ्रांतियां

  • किस अवधि में ईएमआई जमा करने में राहत दी गई है।
  • क्या यह राहत सभी कर्जदारों के लिए है।
  • क्या इस दौरान खाते पर ब्याज पड़ेगा
  • खाते में पैसा है तो ईएमआई कट जाएगी।

बैंक अधिकारियों ने किया स्पष्ट

  • बैंक ऑफ इंडिया के महाप्रबंधक बृज लाल ने बताया कि आरबीआई ने सभी को राहत दी है। ईएमआई में राहत पहली मार्च से 31 मई तक के लिए है। मार्च-अप्रैल और मई के स्टॉलमेंट को आगे बढ़ाया गया है। मार्च का इंस्टॉलमेंट जून में, अप्रैल का इंस्टॉलमेंट जुलाई में और मार्च का इंस्टॉलमेंट अगस्त में अदा करना होगा। इसके पूर्व की यानी फरवरी तक कि सभी इंस्टॉलमेंट जमा करनी है। अगर इस तय अवधि में कोई अपनी इंस्टॉलमेन्ट जमा करना चाहता है तो कर सकता है।
  • पंजाब नेशनल बैंक के महाप्रबंधक समीर बाजपेई ने बताया कि तीन महीने के लिए ईएमआई अदायगी को आगे बढ़ाया गया है। जिन्हें इस दौरान ईएमआई देने में कोई परेशानी नहीं है वह अदा कर सकते हैं। अन्यथा ब्याज का बोझ पड़ेगा। सबसे बड़ी राहत दिया है कि इस दौरान ईएमआई अदा करने के लिए बैंक द्वारा ग्राहक से डिमांड नहीं कि जाएगी, और न ही खाता एनपीए होगा।
  • भारतीय रिजर्व बैंक लखनऊ के क्षेत्रीय निदेशक लक्ष्मीकांत राव ने बताया कि इस संबंध में बैंकों को स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किए जा चुके हैं। हर बैंक अपने अपने स्तर पर ग्राहकों की सहूलियत का ध्यान रखते हुए निर्देशों का पालन करें। बैंक ग्राहकों के प्रति पूरी हमदर्दी है। अगर बैंक निर्देशों का उल्लंघन करते हैं तो उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

 

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