UP News: लखनऊ, राज्य ब्यूरो। किसान अब गोवंश से खेत को बचाने के लिए ब्लेड वाले या फिर कटीले तारों का प्रयोग नहीं कर सकेंगे। उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे प्रतिबंधित कर दिया गया है। खेत की सुरक्षा के लिए अब किसान रस्सी का ही प्रयोग कर सकेंगे। अगर उन्होंने कटीले तार लगाए और उससे गोवंश घायल हुए तो उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होगी। पशुपालन विभाग की ओर से सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ उदाहरणात्मक कार्रवाई की जाए।

दरअसल, आवारा पशुओं से फसल को बचाने के लिए कई किसान ब्लेड या कटीले तारों को लगाते हैं। ऐसे कई मामले सामने आए हैं कि इन तारों की वजह से जानवर घायल हो जाते हैं। इन तारों की वजह से कई जानवरों की मौत तक हो गई है। जानवरों की रक्षा के लिए अब यूपी सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है।

अपर मुख्य सचिव, पशुपालन डा. रजनीश दुबे के मुताबिक पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के अध्याय तीन की धारा-11 के तहत आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत पशु से क्रूर बर्ताव करना, पशुओं को अनावश्यक पीड़ा या यातना पहुंचाना, पशु का अंग विच्छेद करना या उन्हें मार डालना दंडनीय अपराध है।

पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के साथ-साथ उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम, 1955 (यथा संशोधित अधिनियम 2020) की धारा पांच (ख) के अंतर्गत किसी गाय या उसके गोवंश को शारीरिक क्षति पहुंचाना, गोवंश का अंग-भंग करना और उसके जीवन को संकट में डालना दंडनीय अपराध है। ऐसे में इन ब्लेड वाले तारों या कटीले तारों का प्रयोग किसान गोवंश से खेत को बचाने में नहीं कर सकेंगे।

ब्लेड वाले तारों या कटीले तारों की जगह रस्सी या फिर उनके अनुकूल बाड़ा बनाकर खेत की सुरक्षा की जा सकेगी ताकि उन्हें चोट न पहुंचे। घायल और बीमार गोवंश के समुचित इलाज के लिए जनपद मुख्यालय में एक पशु चिकित्सालय 24 घंटे खोला जाए और रोटेशन के आधार पर पशु चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई जाए। पशु चिकित्सालय को 24 घंटे खोलने का दायित्व पशु क्रूरता निवारण समिति के अध्यक्ष के रूप में डीएम को होगा।

Edited By: Umesh Tiwari