लखनऊ(जेएनएन)। देश की प्राचीन चिकित्सा पद्धति को पुन: स्थापित करने व इसका लाभ जन-जन तक पहुंचाने के मकसद से राज्य के आयुष विभाग ने नायाब पहल की है। इसके तहत प्रथम चरण में 16 जिलों में दिसंबर तक निर्माण पूरा करने व जनवरी तक चिकित्सा सेवाएं शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। ये सभी अस्पताल 50-50 बेड के होंगे। यहां मरीजों को आयुष संबंधी मूलभूत जांच व इलाज की अत्याधुनिक सुविधाएं मुहैया होंगी।

आयुष विभाग के अनुसार सफलता मिलने पर भविष्य में प्रदेश के सभी जिलों में 50 बेड वाले अत्याधुनिक आयुष अस्पताल खोले जाएंगे। आयुष विभाग के अनुसार 16 जिलों में आधे से अधिक निर्माण पूरा भी हो चुका है। इसमें लखनऊ व राहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र अमेठी भी शामिल है। इसके अलावा सहारनपुर, सोनभद्र, सुलतानपुर, संतकबीर नगर, कानपुर देहात, ललितपुर, जालौन, कौशांबी, देवरिया जैसे जिलों को पहले ही फेज में यह तोहफा मिलने जा रहा है। प्रत्येक अस्पताल के लिए सात करोड़ 25 लाख का बजट निर्धारित है।

इमरजेंसी से लेकर अन्य सुविधाओं से लैस होगा अस्पताल :

ये सभी अस्पताल इमरजेंसी सुविधाओं से लेकर सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड व पैथोलॉजी जैसी मूलभूत सुविधाओं से लैस होंगे। यहां हिजेमा थेरैपी, पंचकर्मा, सिरोधारा जैसी प्राचीन विधाओं के अलावा सर्जरी, ईएनटी, गठिया, मेडिसिन, बालरोग, स्त्री रोग जैसे विभागों की सुविधा भी मिलेगी। इसके साथ ही यहां पर हो योपैथी, यूनानी व योग विधाओं का लाभ भी मरीजों को मिलेगा। क्या कहते हैं सचिव?

उत्तर प्रदेश आयुष विभाग के सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि यह देश की प्राचीनतम चिकित्सा है, जो एलोपैथी से अधिक सस्ती है। असाध्य से असाध्य रोगों में यह बेहद कारगर है। आयुष का लाभ जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास है। भविष्य में इसे प्रदेश के सभी जिलों तक पहुंचाया जाएगा।

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