लखनऊ, जेएनएन। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले हाई अलर्ट मोड पर आई यूपी पुलिस 'ऑपरेशन ईगल' के तहत अयोध्या पर सेटेलाइट से भी निगाहें गड़ाए है। डीजीपी मुख्यालय शुक्रवार देर रात से ही खासकर 21 संवेदनशील जिलों में हर छोटी गतिविधि पर नजर रख रहा है। पहली बार यूपी 112 मुख्यालय में इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर (ईओसी) स्थापित कर सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक न्यूज चैनल से लेकर फोन व वायरलेस पर आ रहे संदेशों पर एक साथ नजर रखी गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शनिवार सुबह करीब 10 बजे यूपी 112 मुख्यालय ईओसी मुख्यालय पहुंचे। शनिवार रात भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये जिलों से फीडबैक लेने के साथ ही बारावफात की सुरक्षा-व्यवस्था की समीक्षा की गई।

शनिवार की परीक्षा पुलिस ने पार कर ली है लेकिन, उसके समक्ष अभी रविवार को बारावफात व मंगलवार को पूर्णिमा स्नान सकुशल संपन्न कराने की चुनौती है। डीजीपी ओपी सिंह ने गांवों व कस्बों तक में चप्पे-चप्पे पर नजर रखने के साथ ही पुलिसकर्मियों को अभी पूरी तरह मुस्तैद रहने के निर्देश दिए हैं। शनिवार देर शाम के बाद से सतर्कता और बढ़ा दी गई है। खासकर लखनऊ व बरेली जोन के जिलों में कड़ी नजर रखी जा रही है। अयोध्या समेत अन्य जिलों में करीब दो लाख पुलिसकर्मी ड्यूटी पर मुस्तैद किए गए हैं। सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक संदेश वायरल करने के मामले में पुलिस ने 12 मुकदमे दर्ज कर 37 आरोपितों की गिरफ्तारी की है।

आइजी कानून-व्यवस्था प्रवीण कुमार त्रिपाठी ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल 3712 पोस्टों पर कार्रवाई की गई। इनमें अधिकतर व्यक्तियों को उनकी पोस्ट को लेकर पुलिस ने सीधे मैसेज भेजकर कानूनी कार्रवाई के संकेत दिए, जिसके बाद संबंधित व्यक्तियों ने अपनी पोस्टों को खुद डिलीट कर दिया। इनमें डीजीपी मुख्यालय के सोशल मीडिया सेल ने 865 पोस्टों के खिलाफ कार्रवाई की। सबसे अधिक कार्रवाई ट्विटर पर की गईं 2426 पोस्टों पर की गई। सोशल मीडिया पर निगरानी लगातार चल रही है।

देर रात पकड़े गए 25 लोग

पुलिस ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक संदेश वायरल कर रहे 25 लोगों को शुक्रवार देर रात ही पकड़ लिया था। बताया गया कि इनमें एक भाजपा नेता भी शामिल थे।

इसरो से ली गई मदद

यूपी पुलिस अयोध्या में इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) की मदद से सेटेलाइट के जरिये चप्पे-चप्पे पर नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में भी अयोध्या भीड़ नियंत्रण की दृष्टि से इलेक्ट्रॉनिक विजिलेंस को जारी रखा जाएगा। पुलिस लगातार नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (एनटीआरओ) के भी संपर्क में है।

कम्युनिटी एप की रही बड़ी भूमिका

कम्युनिटी एप के जरिये प्रदेश भर में गांवों व कस्बों तक करीब 13 लाख लोगों को जोड़ा गया है। इस एप पर शांति की अपील के संदेश भेजे जाने के साथ ही एप से जुड़े लोगों से पुलिस हर स्तर पर फीडबैक भी ले रही है। पुलिस डिजिटल वालेंटियर के जरिए भड़काऊ संदेश करने वालों की निगरानी भी कर रही है।

वीडियो वॉल पर टिकी हैं निगाहें

यूपी 112 मुख्यालय की भव्य वीडियो वॉल पर फोन कॉल, इलेक्ट्रानिक मीडिया, सोशल मीडिया, कंट्रोल रूम, रेडियो वायरलेस, डिजिटल समाचार पोर्टल से हासिल जानकारियों के आधार पर रणनीति बनाकर तत्काल कार्रवाई की निर्देश हैं। एडीजी असीम अरुण ने बताया कि यहां आइबी व अन्य केंद्रीय एजेंसियों के भी प्रतिनिधि मौजूद हैं और हर सूचना पर नजर रखी जा रही है। सभी आठ जोन की निगरानी के लिए एक-एक डेस्क भी बनाई गई है।

साइबर पेट्रोलिंग से कसा शिकंजा

पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती सोशल मीडिया पर भड़काऊ संदेशों व अफवाहों पर नियंत्रण की है। साइबर पेट्रोलिंग के जरिये इस पर शिकंजा कसा जा रहा है। आइजी कानून-व्यवस्था ने शुक्रवार रात ही मुख्यालय स्थित साइबर सेल के अधिकारियों को आफिस बुला लिया था। देर रात तीन बजे तक आइजी वायरल संदेशों की जांच व कार्रवाई कराते रहे।

Posted By: Umesh Tiwari

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप