लखनऊ, (विनय तिवारी)। सामने फिल्म 'भाग मिल्खा भाग' चल रही है। ओलंपिक्स में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली टीम जो ब्लेजर पहनती है, जिसमें इंडिया का टैग लगा होता है, वह दीवार पर टंगा है। मिल्खा सिंह उस ब्लेजर को निहार रहे हैं। आंखों में सपने तैरने लगते हैं। सोचते हैं पहनकर देखूं कैसा लगता है। ब्लेजर खंूटे से उतारते हैं और पहनकर देखने लगते हैं। इतने में भारतीय चैंपियन, जिसका वह ब्लेजर है, आ जाता है और मिल्खा सिंह से हाथापाई करने लगता है। शोर सुन कोच आ जाते हैं और मिल्खा सिंह को थप्पड़ जड़ देते हैं। कहते हैं, इंडिया का ब्लेजर पहनता है तो इसके लिए मेहनत करनी पड़ती है...।

दर्शकदीर्घा में मिल्खा सिंह बैठे यह दृश्य देख रहे हैं और कोच की उस फटकार को याद कर उनकी आंखें नम हो उठती हैं। फिल्म में भारत-पाकिस्तान बंटवारे की त्रासदी के दृश्य भी हैं, मिल्खा सिंह के प्रेम प्रसंग और विरह का सीन भी है, पर मिल्खा को भावुक किया तो गुरु की डांट के दृश्य ने। यह बताता है कि खेल का उनके जीवन में क्या स्थान था। सही मायने में वे एक खिलाड़ी हैं। गुरु की उस चुनौती का मिल्खा सिंह पर इतना प्रभाव पड़ा था कि अपनी मेहनत की दम पर वे उस जर्सी (ब्लेजर) को हासिल करने में कामयाब रहे जिस पर इंडिया का नाम लिखा था।

रविवार को पद्म श्री मिल्खा सिंह ओमैक्स सिटी स्थित एक्सीलिया स्कूल में एथलेटिक्स ट्रैक व खेल मैदान का उद्घाटन करने पहुंचे थे। इस दौरान पद्मश्री मिल्खा सिंह ने वहां मौजूद छात्र-छात्राओं, शिक्षक व अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि हर ब'चा पढ़ाई के साथ-साथ खेल में भी देश का नाम बढ़ाए। कहा कि मेरी ख्वाहिश है कि एथलेटिक्स ओलंपिक में भारत मेडल जीते। उन्होंने ट्रैक के साथ एथेलेटिक्स एकेडमी खोलने की भी वकालत की। इस मौके पर प्रधानाचार्या सोनिया वर्धन, महाप्रबंधक शेखर वाष्र्णेय, शालिनी पाठक ने मिल्खा सिंह का आभार प्रकट किया।

हिंदी को दें महत्व

मिल्खा सिंह ने कहा, आए दिन कई कार्यक्रमों में आता-जाता रहता हूं। वहां पर ज्‍यादातर लोग अंग्रेजी में ही बातचीत करते हैं, लेकिन हमें अपने हिन्दुस्तानी होने पर गर्व होना चाहिए। हिन्दी को तवज्जो देनी चाहिए। कहा कि इस कार्यक्रम में आकर लोगों को हिंदी बोलते देखा तो उन्हें खुशी हुई।

Posted By: Anurag Gupta

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