लखनऊ, जेएनएन। देश के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की पहली पुण्य तिथि पर आज देश उनको नमन कर रहा है। लोकभवन में शुक्रवार को उत्तर प्रदेश सरकार ने भी श्रद्धांजलि सभा आयोजित की। उत्तर प्रदेश सरकार उनकी जयंती पर 25 दिसंबर को लोकभवन में अटल बिहारी वाजपेयी की 25 फीट ऊंची ऊँची प्रतिमा का लोकार्पण करेगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें याद किया। उन्होंने कहा कि आज भी सभी की जुबां पर अटल जी का ही नाम है। हर किसी के मन में उनके लिए सम्मान है। अटल जी की नजर में कोई भी व्यक्ति छोटा बड़ा नहीं था। वो सदैव कहते थे कि मैं मरने से नहीं डरता हूं, बदनामी से डरता हूं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल जी के विचार प्रेरणा के स्त्रोत हैं। उन्होंने राजनीति में पारदर्शिता का काम किया है। उन्होंने अखंड भारत का सपना देखा था। अनुच्छेद 370 हटाकर सरकार ने उनको श्रद्धांजलि दी है। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अटल जी एक कवि, एक मंत्री, एक राजनेता, एक पीएम के रूप में हमेशा अटल रहे हैं। मूल्यों के साथ आदर्शों के लिए वो हमेशा प्रतिबद्ध थे। लखनऊ लंबे वक्त तक उनकी कर्मभूमि रही और उन्होंने लखनऊ को हमेशा से ही प्राथमिकता दी। मुख्यमंत्री ने कहा अटल जी के सम्मान में प्रदेश सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। लखनऊ में बने इकाना स्टेडियम का नाम अटल जी के नाम पर रखा गया है। इसके साथ ही लखनऊ में चिकित्सा विश्वविद्यालय प्रक्रिया में है। बलरामपुर में केजीएमयू का सेटेलाइट सेंटर स्थापित किया जा रहा है, जिसे कालांतर में मेडिकल कॉलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। यही नहीं 18 मंडलों में आवासीय विद्यालय भी अटली जी के नाम पर बनेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 दिसंबर को लोकभवन में अटल जी की 25 फुट की प्रतिमा का लोकार्पण करने की घोषणा की। सीएम योगी आदित्यनाथ ने अटल जी के नाम पर प्रदेश सरकार बटेश्वर में स्मारक भी बना रही है। अटल जी की स्मृति में डीएवी कॉलेज, कानपुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना के लिए भी 5 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने छह दशक तक मूल्यों की राजनीति की और सभी कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि देशहित में कठोर फैसले लेने वाले अटल जी संवेदनशील कवि भी थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि संघर्षमय जीवन, परिवर्तनशील परिस्थितियों, राष्ट्रव्यापी आन्दोलन, जेल-जीवन आदि अनेक आयामों के प्रभाव और अनुभूतियों ने उनकी कविताओ में हमेशा अभिव्यक्ति पाई। ओजस्वी वक्ता होने के कारण विरोधी भी उनकी बात गम्भीरता से सुनते थे। अटल जी ने जीवनपर्यन्त राष्ट्रहित को सर्वोपरि माना। अटल जी के व्यक्तित्व का आकर्षण ऐसा था कि उनके चिरविरोधी, जिनका उनसे वैचारिक मतभेद था, वे भी उनका हृदय से सम्मान करते थे।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अपने प्रधानमंत्रित्व कार्यकाल के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना लागू कर उसे मूर्त रूप दिया। उन्होंने स्वर्णिम चतुर्भुज योजना, सर्वशिक्षा अभियान आदि की आधारशिला रखी। इनके साथ ही मेट्रो रेल के संचालन में उनके कार्यकाल में नए कीर्तिमान स्थापित किए गए। अटल जी के लिए राष्ट्रहित सर्वोपरि था। उन्होंने देश में आधारभूत ढांचे के विकास और भारतीय अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बहुआयामी कार्य किए। उनका मानना था कि देश के विकास का केन्द्र बिन्दु ग्रामीण भारत ही हो सकता है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अटल जी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी और पं. दीनदयाल उपाध्याय जी से राजनीति के संस्कार ग्रहण किए तथा उन्हीं के बल पर सुशासन की आधारशिला रखी। हमारे लिये यह गौरव का विषय है कि उत्तर प्रदेश, श्रद्धेय अटल जी की कर्मभूमि रहा है। भारतीय संसद की गौरवशाली परम्पराओं को समृद्ध करने के लिए अटल जी को सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार भी प्रदान किया गया था। स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी भारतीय राजनीति के शिखर पुरुष थे। अटल जी का व्यक्तित्व बहुआयामी और प्रेरक था।

सीएम योगी आदित्यनाथ अटल जी ने संसद में कहा था कि मेरे लिए दल से बढ़ कर देश है, हम रहें न रहें, देश रहना चाहिए। अटल उस व्यक्तित्व का नाम है, जिसने कभी अपने सिद्धान्तों और आदर्शों से समझौता नहीं किया। जब सदन में विश्वासमत के लिए मतदान होना था तब अटल जी ने शूद्रक के नाटक 'मृच्छकटिकम' का भगवान राम को संदर्भित एक श्लोक पढ़ा था। 'न भीतो मरणादस्मि केवलं दूषितो यश:' अर्थात मैं मृत्यु से नहीं डरता, अगर डरता हूं तो बदनामी से डरता हूं। आज भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रथम पुण्य तिथि के अवसर पर यहां आयोजित इस कार्यक्रम में सम्मिलित होकर मुझे अत्यन्त गौरव की अनुभूति हो रही है। इस अवसर पर मैं उन्हें नमन करते हुए श्रद्धांजलि देता हूं। 

इससे पहले कार्यक्रम का संचालन कर रहे उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि दी। इसके साथ ही उनसे जुड़े कई दिलचस्प बातों को भी सुनाया। उन्होंने कहा कि अटल जी से बहुत कुछ सीखने को मिला है। वो हमेशा व्यक्ति को जोडऩे का काम करते थे तोड़ने का नहीं। उनकी सभा को सुनने के लिए विपक्ष के भी लोग आया करते थे। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी अटल विहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि भले ही आज अटल जी इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन वह अपने विचारों के माध्यम से हमेशा हमारे बीच जीवित रहेंगे। वो सिर्फ शरीर से हमारे साथ नहीं हैं लेकिन विचारों से आज भी अटल जी हमारे साथ हैं।

अटल जी ने कहा था कि कांग्रेस के लोग आज हमारे ऊपर हंस रहे हों, लेकिन एक दिन भाजपा की 300 से ज्यादा सीटें हमारी होंगी। उन्होंने कहा कि आज अटल जी का आशीर्वाद सबके साथ है। अटल जी के मन मे कभी भी घमंड नहीं आया। प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए भी उनको अहंकार कभी छू नहीं पाया। इस कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. ह्रदय नारायण दीक्षित, कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना, यूपी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह समेत भाजपा के कई बड़े नेता मौजूद रहे।

अटल के नाम हो सकता है लोकभवन

मुख्यमंत्री के पुराने कार्यालय का नाम पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री के नाम पर है। अटल की जयंती पर लोकभवन में प्रतिमा स्थापना के साथ ही इसका नाम अटल भवन किया जा सकता है। इस बात के संकेत मिले हैं।

लविवि में बनेगी अटल सुशासन पीठ

लखनऊ विश्वविद्यालय (लविवि) में अटल सुशासन पीठ बनेगी। उच्च शिक्षा विभाग ने इसके लिए दो करोड़ रुपये की धनराशि जारी की है। पीठ में अटल से संबंधित विचारों पर अध्ययन, शोध और संगोष्ठी आदि का आयोजन किया जाएगा। यह जानकारी विशेष सचिव उच्च शिक्षा मनोज कुमार ने दी।

Posted By: Dharmendra Pandey

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