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पिता के गढ़ से निकलकर पूरे यूपी में कांग्रेस को संभालेंगी मोना, अब तक का कैसा रहा राजनीतिक सफर

Published: Fri, 02 Oct 2026 11:21 PM (IST)

कांग्रेस ने आराधना मिश्रा 'मोना' को उत्तर प्रदेश का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। उनके सामने संगठन को चुनावी ...और पढ़ें

आराधना मिश्रा मोना बनीं यूपी कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष।

आराधना मिश्रा मोना बनीं यूपी कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष।

HighLights

  1. आराधना मिश्रा 'मोना' यूपी कांग्रेस की नई अध्यक्ष बनीं।

  2. रामपुर खास से तीन बार की विधायक, प्रमोद तिवारी की बेटी।

  3. संगठन को चुनावी मोड में लाना और बूथ स्तर तक सक्रिय करना मुख्य चुनौती।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। कांग्रेस ने विधान सभा चुनाव से पहले प्रदेश अध्यक्ष की कमान बदलकर बड़ा सियासी संदेश दिया है। रामपुर खास से लगातार तीन बार की विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया है। अब तक विधान सभा में कांग्रेस की आवाज बुलंद करने वाली मोना के सामने पूरे प्रदेश में संगठन को चुनावी मोड में लाने की चुनौती भी होगी।

करीब 54 वर्षीय आराधना मिश्रा वर्ष 2014 के उपचुनाव से रामपुर खास की राजनीति में सक्रिय हुईं और 2017 तथा 2022 के विधान सभा चुनाव में भी इसी सीट से निर्वाचित हुईं थीं। वर्ष 2022 के विधान सभा चुनाव के बाद उन्हें कांग्रेस विधानमंडल दल का नेता चुना गया था।

दो विधायकों वाली कांग्रेस के लिए विधान सभा में पार्टी का पक्ष रखने से लेकर सरकार को घेरने तक उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। अब यही अनुभव उन्हें प्रदेश संगठन की जिम्मेदारी में काम आएगा।

मोना वरिष्ठ कांग्रेस नेता व राज्य सभा सदस्य प्रमोद तिवारी की बेटी हैं। तिवारी रामपुर खास से नौ बार विधायक रहे हैं और इस क्षेत्र में उनका लंबा राजनीतिक प्रभाव रहा है।

मोना ने इसी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए रामपुर खास में अपनी पकड़ कायम रखी। हालांकि प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी के साथ उनकी राजनीति का दायरा अब पारंपरिक पारिवारिक गढ़ से बाहर निकलकर पूरे प्रदेश तक पहुंचेगा। यही उनके राजनीतिक सफर का अगला बड़ा पड़ाव है।

‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ अभियान में भूमिका

मोना की ताजपोशी कांग्रेस के महिला नेतृत्व को आगे करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। वर्ष 2022 के चुनाव में कांग्रेस के ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ अभियान में उनकी सक्रिय भूमिका रही थी। पार्टी के भीतर उन्हें प्रमुख महिला चेहरों में गिना जाता रहा है। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उनकी जिम्मेदारी सिर्फ संगठन चलाने तक सीमित नहीं होगी।

महिला मतदाताओं के बीच कांग्रेस की पहुंच बढ़ाना, जमीनी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना और पार्टी के मुद्दों को बूथ स्तर तक पहुंचाना भी उनकी प्राथमिक चुनौतियों में शामिल होगा। हालांकि इसका चुनावी असर क्या होगा, यह आगे संगठन के प्रदर्शन और चुनावी राजनीति में ही स्पष्ट होगा। फिलहाल पार्टी की कोशिश अलग-अलग सामाजिक समूहों तक अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की दिखाई दे रही है।

सामाजिक समीकरण पर भी नजर

मोना की नियुक्ति को कांग्रेस के व्यापक सामाजिक-संगठनात्मक पुनर्संयोजन के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। उनके साथ इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व का आयाम जुड़ता है। पार्टी ने इससे पहले राजेंद्र पाल गौतम को प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी दी थी।

चुनाव से पहले सबसे बड़ी परीक्षा संगठन की

प्रदेश कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने की होगी। प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर मोना को जिलों में पार्टी संगठन, विधान सभा क्षेत्रवार तैयारियों, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और सहयोगी दलों के साथ राजनीतिक तालमेल जैसे मोर्चों पर काम करना होगा। सीट बंटवारे को लेकर सहयोगी दलों के साथ बातचीत का मुद्दा भी सामने है।

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