18 साल की कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ शुरू किया खुद का काम, 3000 महिलाओं को नई राह दिखाकर बदल दी जिंदगी
लखनऊ की अपर्णा मिश्रा ने 18 साल की कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर उद्यमिता का मार्ग चुना और अब तक 3000 महिला उद्यमियों को सशक्त किया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।
HighLights
18 साल कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ बनीं सफल उद्यमी।
3000 महिला उद्यमियों को दिया मार्गदर्शन और नई राह।
'वीमेन शाइन चैंबर' से महिलाओं को मिल रहे व्यावसायिक अवसर।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। सफलता की राह अक्सर संघर्षों से होकर गुजरती है, लेकिन जब इरादे मजबूत हों, तो हर असफलता एक नई शुरुआत का माध्यम बनती है। कुछ ऐसी ही कहानी हैं लखनऊ के अलीगंज की अपर्णा मिश्रा की। लगभग 18 वर्षों तक कारपोरेट जगत में काम करने के बाद, उन्होंने उद्यमिता का मार्ग चुना। खुद तो एक सफल उद्यमी बनीं साथी तीन हजार महिला उद्यमियों को नई उड़ान दी।
अपर्णा मिश्रा ने जब साल 2008 में महिलाओं के लिए मेंटरशिप और नेटवर्किंग व्यवसाय शुरू किया। उन्होंने शिक्षा, ट्रेनिंग और रिक्रूटमेंट के क्षेत्र से शुरुआत की और 100-सीटर आउटबाउंड बीपीओ खड़ा किया, जिसे उन्होंने सात वर्षों तक सफलतापूर्वक संचालित किया।
इस यात्रा में बड़ा मोड़ तब आया जब आग लगने बीपीओ सेटअप नष्ट हो गया। दोबारा शुरुआत करने के बाद कान्ट्रैक्ट समाप्त होने से आर्थिक और भावनात्मक चुनौतियां और बढ़ गईं। इस मुश्किल दौर ने उन्हें जीवन का सबसे बड़ा सबक दिया। मजबूती और एक सही 'सपोर्ट सिस्टम' की अहमियत।
आइआइटी कानपुर से शुरू की एक नई यात्रा
उद्यमिता को गहराई से समझने के लिए उन्होंने आइएसबी हैदराबाद में वीमेन इंटरप्रेन्योरशिप कार्यक्रम किया। इसके बाद उन्होंने आइआइटी कानपुर के इनक्यूबेशन प्रोग्राम में सोशल एंटरप्रेन्योरशिप स्टार्टअप्स को मेंटर करना शुरू किया।
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कोविड-19 के दौर में वीमेन शाइन चैंबर संस्था की शुरुआत की। इसके जरिए वह मुफ्त में महिला उद्यमियों को सही मार्गदर्शन और प्रदर्शनियां लगवाकर उनके उद्योग को एक मंच देना शुरू किया। उनके संस्था से आज 250 से अधिक महिला उद्यमी जुड़ी हुई हैं। इससे उन्हें सहयोग और नए व्यावसायिक अवसर मिल रहा है।
ग्रामीण महिला उद्यमियों को बढ़ावा देना नया लक्ष्य
अपर्णा मिश्रा कहती हैं वास्तविक सशक्तिकरण केवल प्रेरणा देने से नहीं, बल्कि महिलाओं के काम को पहचान दिलाने, उनके बिजनेस को विजिबिलिटी देने और वित्तीय स्वतंत्रता के रास्ते खोलने से आता है।
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नया लक्ष्य इस पहल को देश के छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों तक ले जाना है, ताकि वहां की महिलाएं भी आत्मविश्वास, कौशल और वित्तीय आत्मनिर्भरता हासिल कर सकें।
