रायबरेली [विद्यासागर श्रीवास्तव]। सरेनी गांव के अमीन हाशमी सर्वे भवन्तु सुखिन: के भाव को आत्मसात करते हुए कोरोना संक्रमण के खिलाफ मजबूती से जंग लड़ रहे हैं। धर्म और कर्म क्या होता है, लोगों को सिखा रहे हैं। रमजान में खुद तो रोजे से हैं लेकिन, गरीब व असहायों को भोजन कराने के साथ ही गांव के हर घर को रोजाना सैनिटाइज करते हैं। इसमें उनकी मदद कर रहे हैं उनके बेटे। बहरहाल, हाशमी की बनाई राह पर अन्य लोग भी चल पड़े हैं।

कोरोना महामारी ने अपने पैर पसारे तो 55 वर्षीय अमीन ने गांव में स्वच्छता का बीड़ा उठा लिया। सुबह वह अपने बेटों हारून, वजीफा, बबलू और अनीश के साथ गांव के प्रत्येक घर और धार्मिक स्थल को सैनिटाइज करके ही लौटते हैं। समाज हित में स्वच्छता का संदेश दे रहा ये परिवार एक बड़ी नजीर है। कोरोना को हराने में स्वच्छता की अहम भूमिका है। ये बात समझ में आई तो सब इनके साथ जुडऩे लगे। गांव के ज्यादातर लोग सफाईकर्मी के आने का इंतजार नहीं करते बल्कि झाड़ू उठाकर खुद ही आसपास की सफाई कर डालते हैं। नालियों में कीटनाशक का छिड़काव भी किया जा रहा है।

बेटे कर रहे आर्थिक मदद

अमीन के दो बेटे हारून और अतीक सउदी अरब में नौकरी करते हैं, जो कि घर आए हुए हैैं। वही इस कार्य में उनकी आॢथक मदद और सहभागिता कर रहे हैं। लॉकडाउन की शुरुआत में सोडियम हाइपोक्लोराइड और ब्लीचिंग पाउडर से गांव को सैनिटाइज कराया। फिर लगातार मेथालिन और केरोसिन का छिड़काव कर रहे हैं ताकि मच्छरजनित रोग न फैल पाएं।

शाम को करा रहे भरपेट भोजन

हाशमी परिवार शाम के वक्त गांव के लगभग 50 जरूरतमंदों को भरपेट भोजन करा रहा है। कभी दाल, चावल, सब्जी और रोटी तो कभी पकवान। परिवार की महिलाएं ही भोजन तैयार करतीं हैं।

समाजसेवी अमीन हाशमी ने बताया कि हमारे परिवार ने कोरोना को परास्त करने की ठान ली है। कामकाज बंद होने से कई परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। हमसे जितना हो पा रहा है, उतने लोगों को हम भोजन मुहैया करा रहे हैं। स्वयंसेवी संस्थाओं से भी मदद मिल रही है।

ग्राम प्रधान सरेनी खलीकुन्निशां ने बताया कि अमीन हाशमी सही मायने में समाजसेवा कर रहे हैं। हम सब भी उनके सहयोग के लिए तत्पर हैं। अब तो हर वर्ग के लोग स्वच्छता अभियान में उनके साथ हैं। 

Posted By: Anurag Gupta

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