लखनऊ, जेएनएन। 102, 108  एम्बुलेंस की हड़ताल की वजह एक आदमी की मौत हो गई। दिल का दौरा पड़ने की वजह से मरीज को लॉरी रेफर किया गया था, लेकिन एंबुलेंस नहीं आ पाई। जब तक निजी एंबुलेंस आई तब तक मरीज ने दम तोड़ दिया। तीन महीने से भुगतान नहीं मिलने से आक्रोशित एम्बुलेंस 102 व 108  के चालक ने प्रदेशीय आह्वान पर हड़ताल पर चले गए। राजधानी लखनऊ में हड़ताल के चलते अस्पतालों के बाहर पुलिस बल तैनात किया गया। 

बीकेटी तहसील में तैनात होमगार्ड जसवंत को पौने दो बजे दिल का दौरा पड़ा था। जिसके बाद उसे राम सागर सौ बेड अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उसे  इलाज के बाद चिकित्सक ने लारी के लिये रेफर किया। हड़ताल के चलते 102  एम्बुलेंस की हड़ताल की वजह से परिवारीजनों ने निजी एम्बुलेंस बुलाई, लेकिन जब तक वो पहुंची होमगार्ड ने दम तोड़ दिया। 

बुरा है हाल 

बीकेटी स्थित नगर पंचायत महोना की रसीदन (70) तेज बुखार आने और ब्लड प्रेशर हाई हो जाने पर परिवार लोगों ने एम्बुलेंस 108 के लिए 11:42 बजे फोन किया। लेकिन हड़ताल के चलते एम्बुलेंस नहीं पहुंची। मजबूरन परिवार वालों को मरीज को आटो से राम सागर मिश्र सौ शैय्या संयुक्त चिकित्सालय ले जाना पड़ा। इसके बाद मरीज को अस्पताल में भर्ती कर लिया गया है। वहीं, काकोरी सीएचसी पर 108 व 102 एम्बुलेंस खड़ी दिखाई दी। लखनऊ मंडल में भी  एम्बुलेंस 102 व 108  के चालकों की हड़ताल का प्रभाव दिखाई दिया। 

सीतापुर में मांगों को लेकर जिले भर के एम्बुलेंस चालक हड़ताल पर चले गए। इससे पूरे जिले की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गईं। जिले में एम्बुलेंस 102 सेवा की 46 व 108 सेवा की 47 और एएलएस की 4 एम्बुलेंस हैं। चालकों का कहना है कि तीन माह से मानदेय नहीं मिला है। हमारा शोषण किया जा रहा है। चालकों के हड़ताल पर जाने से प्रसव के लिए महिलाओं को दिक्कतें हुईं।

बहराइच में प्रदेशीय आह्वान पर रविवार रात से ही एम्बुलेंस चालक हड़ताल पर चले गए। जिला अस्पताल परिसर में वाहनों को खड़ा कर नारेबाजी की। प्रदर्शन करते हुए चेतावनी दी कि जब तक भुगतान नहीं मिलेगा हड़ताल जारी रहेगा।

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गोंडा में भी एम्बुलेंस कर्मी हड़ताल पर चले गए हैं। जिले में 102, 108 की कुल 70 एंबुलेंस चल रही है। एंबुलेंस कर्मी मानदेय का भुगतान समय से न मिलने व अन्य समस्याओं को लेकर आक्रोशित है। कर्मियों का कहना है कि मानदेय भुगतान की मांग करने पर कोई सुनने को तैयार नहीं है। इससे उनके सामने कई समस्या पैदा हो गई है। अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ.सतीश कुमार का कहना है कि उच्चाधिकारियों को जानकारी दी जा रही है।

रायबरेली स्थित जीआईसी मैदान में रविवार देर रात वाहनों को खड़ा कर एम्बुलेंस चालकों ने नारेबाजी की। प्रदर्शन करते हुए चेतावनी दी कि जब तक भुगतान नहीं मिलेगा हड़ताल जारी रहेगा। इसके चलते देर रात सीएचसी और जिला अस्पताल में आने वाले गंभीर रोगियों को परेशान होना पड़ा। तीमारदारों को निजी एम्बुलेंस का सहारा लेना पड़ा। जिसके चलते सोमवार को सुबह से ही अफरा-तफरी का माहौल है। बता दें, जिले में एम्बुलेंस 102 व 108 की संख्या 89 है। जिनमें 284 कर्मचारी कार्यरत हैं। इन दोनों एम्बुलेंस को अलग अलग फर्मों द्वारा संचालित किया जा रहा है। 

लखीमपुर में जिलेभर की सभी सरकारी एम्बुलेंस ने पावर ब्रेक लगा दिया है। एम्बुलेंस कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। जिले में 1700 कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार किया है।

बाराबंकी में सामान्य स्थिति

बाराबंकी में वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदेश संगठन के आह्वान पर जिले में एम्बुलेंस वाहन चालकों की हड़ताल अभी तक बेअसर दिखाई दी। जिला चिकित्सालय, कोठी व हैदरगढ़ सीएचसी पर पुलिस बल तैनात किया गया। जिले में 102 की 44 व 108 की 36 एम्बुलेंस का संचालन होता है। एंबुलेंस सेवाओं के मैनेजर राजू गुप्ता के मुताबिक, जिले में सामान्य स्थिति है।

वार्ता के बाद वापस हुई हड़ताल 

108 एम्‍बुलेंस के प्रवक्‍ता सुनील यादव ने बताया कि देर शाम जीवीके कंपनी के अधिकारियों और एम्‍बुलेंस चालकों के बीच वार्ता हुई जिसके बाद जाकर हड़ताल वापस हुई। 

 

Posted By: Divyansh Rastogi

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