लखनऊ, जेएनएन। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार को बड़ी राहत देते हुए सहायक शिक्षकों के 68500 पदों पर भर्ती प्रकिया की सीबीआइ जांच पर अंतरिम रोक लगा दी है। एकल पीठ के आदेश पर रोक लगाते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सीबीआइ को विवेचना में आगे कोई कार्रवाई करने से भी मना कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी होगी।

यह आदेश चीफ जस्टिस गोविंद माथुर व जस्टिस मनीष माथुर की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की ओर से दायर स्पेशल अपील पर दिया है। स्पेशल अपील में राज्य सरकार ने एकल पीठ के एक नवंबर, 2018 के अंतरिम आदेश को मनमाना करार देते हुए चुनौती दी थी। एकल पीठ के जस्टिस इरशाद अली ने शिक्षक भर्ती में प्रथम दृष्टया भ्रष्टाचार होने की बात कहते हुए सीबीआइ को पूरी चयन प्रक्रिया की जांच करने के आदेश दे दिए थे। यह भी कहा था कि यदि जांच में शिक्षा विभाग के किसी अधिकारी की संलिप्तता पाई जाती है तो सक्षम अधिकारी उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करे।

स्पेशल अपील पर सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने तर्क दिया कि पूरी भर्ती प्रकिया पारदर्शी व निष्कलंक है, जबकि एकल पीठ ने अपने आदेश में बिना किसी सुबूत और जांच के ही भर्ती में भ्रष्टाचार होने की बात कह दी, जो कि तथ्यों के विपरीत और मनमाना है। महाधिवक्ता ने तर्क दिया कि कुछ परीक्षार्थियों के मामले में परीक्षक से गलती हो गई थी, जिसे स्वीकार करते हुए दुरुस्त कर लिया गया था। इसके बाद सीबीआइ से जांच कराने का कोई औचित्य नहीं है।

डिवीजन बेंच ने महाधिवक्ता के तर्कों से सहमति जताते हुए कहा कि बिना जांच के किसी भर्ती प्रकिया में भष्टाचार होने की बात आदेश में दर्ज करना उचित नहीं है। डिवीजन बेंच ने सीबीआइ के वकील बीरेश्वर नाथ से पूछा कि क्या सीबीआइ ने जांच शुरू है? इस पर उन्होने जवाब दिया कि अभी प्राथमिकी ही दर्ज की गई है। इसके बाद डिवीजन बेंच ने सीबीआइ को जांच प्रकिया आगे बढ़ाने से रोक दिया।

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Posted By: Dharmendra Pandey

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