लखनऊ, जेएनएन। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बाराबंकी के रामसनेही घाट तहसील परिसर में स्थित रही मस्जिद के स्थान पर अजान करने और पांच वक्त की नमाज पढ़ने की अंतरिम अनुमति मांगने पर अपना आदेश मंगलवार को सुरक्षित कर लिया। यह मस्जिद प्रशासन ने 17 मई, 2021 को अवैध कहकर ढहा दी थी। कोर्ट ने सरकार को याचिका पर अपना विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को भी कहा है।

यह आदेश जस्टिस राजन रॉय व जस्टिस सौरभ लवानिया की पीठ ने आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की रिट याचिका पर पारित किया। याचिका में दावा किया गया है कि उक्त मस्जिद सौ साल पुरानी थी। रिकार्ड में उक्त मस्जिद वर्ष 1968 से ही दर्ज थी। याचिका में रामसनेही घाट के एसडीएम पर मनमाने तरीके से कार्रवाई करते हुए मस्जिद को 17 मई को ध्वस्त करवाने का आरोप लगाया गया है। एसडीएम को दंडित करने का आदेश राज्य सरकार को देने की भी मांग की गई है।

याचिका का विरोध करते हुए, सरकारी वकील ने दलील दी कि मस्जिद कमेटी को बाकायदा नोटिस जारी किया गया था लेकिन कमेटी की ओर से जवाब ही नहीं दिया गया। इसके बाद विधि अनुसार कार्यवाही करते हुए उक्त अवैध मस्जिद को वहां से हटा दिया गया।

सरकारी वकील ने सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा याचिका दाखिल करने के अधिकार पर भी सवाल उठाया गया। हालांकि सरकारी वकील ने सरकार से निर्देश न प्राप्त हो पाने के कारण समय दिए जाने की मांग की। पीठ ने सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया, साथ ही अंतरिम राहत की मांग पर अपना आदेश सुरक्षित कर लिया है।

Edited By: Umesh Tiwari