यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 12, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू की जमानत अर्जी पर सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और प्रियंका वाड्रा के सचिव संदीप सिंह की जमानत ...और पढ़ें

लखनऊ, जेएनएन। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा के सचिव संदीप सिंह की ओर से दाखिल अलग-अलग जमानत याचिकाओं पर संबंधित सरकारी वकीलों को निर्देश प्राप्त कर कोर्ट को अवगत कराने को कहा है। याचिका पर सुनवाई के बाद बेंच ने सरकार से निर्देश प्राप्त करने के लिए तीन दिन का समय दिया है। अगली सुनवाई 16 जून को होगी।
यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने जमानत याचिका तो संदीप सिंह ने अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है। अजय कुमार लल्लू के मामले की सुनवाई जस्टिस एआर मसूदी की बेंच के समक्ष हुई तो संदीप सिंह की अग्रिम जमानत अर्जी पर जस्टिस राजेश सिंह चौहान ने सुनवाई की। अजय कुमार लल्लू की ओर से दाखिल याचिका पर वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई हुई। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता व कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी और सत्येंद्र सिंह ने बहस की। याचिका पर सुनवाई के उपरांत बेंच ने सरकारी वकील को निर्देश प्राप्त करने के लिए तीन दिन का समय दिया है। अगली सुनवाई 16 जून को होगी।
वहीं, कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा के सचिव संदीप सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता जेएन माथुर ने बहस और नदीम मुर्तजा ने बहस की। याचिका पर सुनवाई के उपरांत इस बेंच ने भी सरकारी वकील को तीन दिन का समय निर्देश प्राप्त करने व केस डायरी मंगाने के लिए दिया। कोर्ट ने जवाबी हलफनामा दाखिल करने की भी अनुमति दी है। इस मामले की सुनवाई 17 जून को होगी।
उल्लेखनीय है कि एमपी-एमएलए कोर्ट ने लल्लू की जमानत अर्जी एक जून को खारिज कर दी थी। पिछले दिनों हुए बस विवाद मामले में दर्ज एफआईआर में दोनों अभियुक्त हैं। अजय कुमार लल्लू को 20 मई को आगरा में अवैध रूप से धरना-प्रदर्शन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उसी दिन जमानत मिलने के तत्काल बाद लखनऊ पुलिस ने उन्हें बस विवाद के मामले में गिरफ्तार कर लिया। हालांकि संदीप सिंह की अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई है। दोनों पर बसों के कागजों में फर्जीवाड़ा करने का आरोप है।
