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यौन उत्पीड़न की जांच करने वाले चार राज्य कर अधिकारियों को इलाहाबाद HC से राहत, अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक

Published: Fri, 02 Oct 2026 11:30 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने यौन उत्पीड़न जांच से जुड़े चार राज्य कर अधिकारियों को राहत दी है। ...और पढ़ें

यौन उत्पीड़न की जांच करने वाले चार राज्य कर अधिकारियों को हाई कोर्ट से राहत।

यौन उत्पीड़न की जांच करने वाले चार राज्य कर अधिकारियों को हाई कोर्ट से राहत।

HighLights

  1. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने चार राज्य कर अधिकारियों को अंतरिम राहत दी।

  2. यौन उत्पीड़न जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाली चार्जशीट पर रोक।

  3. कोर्ट ने राज्य सरकार से दो सप्ताह में जवाब मांगा है।

विधि संवाददाता, लखनऊ। कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायतों की जांच करने वाले राज्य कर विभाग के चार अधिकारियों को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राहत दी है। कोर्ट ने उनके खिलाफ जारी चार्जशीट पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने चारों अधिकारियों की अलग-अलग रिट याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से दो सप्ताह में जवाब मांगा है।

याचिकाकर्ताओं में राज्य कर विभाग की डिप्टी कमिश्नर प्रातिभा, असिस्टेंट कमिश्नर पूजा गौतम, असिस्टेंट कमिश्नर कोमल छाबड़ा और डिप्टी कमिश्नर संजीव कुमार शामिल हैं। चारों ने 23 फरवरी को जारी चार्जशीट को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि चारों याचिकाओं का मूल मुद्दा एक ही है, इसलिए इन पर साझा आदेश पारित किया जा रहा है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आलोक मिश्रा और प्रियांशु शुक्ला ने कोर्ट को बताया कि अधिकारियों ने यौन उत्पीड़न की शिकायत की जांच के दौरान संबंधित तथ्यों को दर्ज किया और गवाहों के बयान भी लिए। इसके बावजूद विभागीय चार्जशीट में जांच के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया पर ही सवाल उठाए गए हैं।

आरोपों में यह भी कहा गया कि संबंधित तथ्यों की जानकारी होने के बावजूद आरोपित को दोषी ठहराते समय उन तथ्यों पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया और घटना के आसपास मौजूद लोगों के बयान क्यों दर्ज किए गए।

अधिवक्ताओं ने आरोपों को अस्पष्ट बताते हुए कहा कि यदि यौन उत्पीड़न की शिकायतों की जांच करने वाले अधिकारियों को जांच की प्रक्रिया के लिए ही विभागीय कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा तो भविष्य में अधिकारी ऐसी शिकायतों की जांच करने से हिचक सकते हैं।

राज्य की ओर से अपर महाधिवक्ता एसएम सिंह रायकवार ने याचिकाओं का विरोध किया। उन्होंने बताया कि इसी विवाद से जुड़ी विशेष अपील दो न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष लंबित है।

उनका कहना था कि उस मामले की सुनवाई के दौरान विभागीय कार्रवाई आगे बढ़ाने की बात कही गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं ने अभी तक चार्जशीट का जवाब दाखिल नहीं किया है।

कोर्ट ने प्रथमदृष्टया माना कि चार्जशीट में लगाए गए आरोपों के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया जाना आवश्यक है। राज्य सरकार को दो सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद याचिकाकर्ता एक सप्ताह में प्रत्युत्तर दाखिल करेंगे। तब तक चार्जशीट पर रोक प्रभावी रहेगी।