लखनऊ (जेएनएन)। दानपुण्य और संस्कार का पर्व अक्षय तृतीय 18 अप्रैल को है। इस दिन न केवल सोने-चांदी व अन्य धातुओं की खरीदारी करना श्रेयस्कर होगा बल्कि इन दिन किए गए दान का भी कभी क्षय नहीं होता। दिनभर खरीदारी का मुहूर्त होने से इस बार शॉपिग करने वाले शौकीनों के लिए खास मौका है। शादियों का शुभ मुहूर्त होने के कारण इस दिन शहर में शादियों की भी धूम रहेगी। 

अक्षय दान-पुण्य की अक्षय तृतीया के दिप भगवान परशुराम जयंती भी मनाई जाती है। बुधवार का दिन होने के साथ ह मध्याह्न योग की वजह से दिन भर खरीदारी और मांगलिक कार्य किए जा सकेंगे। पं.राधेश्याम शास्त्री ने बताया कि 18 अप्रैल की भोर में 3:48 बजे से तृतीया का मान शुरू हो जाएगा और 19 को भोर में तीन बजे तक रहेगा। भगवान परशुराम की जयंती मध्यान्ह और तृतीया में मनाए जाने की परंपरा है, इसीलिए परशुराम जयंती 18 अप्रैल की दोपहर में मनाना श्रेयस्कर होगा। दिन भर अक्षय तृतीया का मान होने के चलते बंपर वैवाहिक मुहूर्त व शापिंग के मुहूर्त सुबह से मिल रहे हैं। सुबह 11:30 से दोपहर 12:30 अभिजित मुहूर्त है। 1:39 से दोपहर 3:54 तक सिंह लग्न में पूजा की जा सकेगी। कन्या लग्न में दोपहर 3:58 से शाम 6:28 तक पूजन के साथ अन्य कार्य किए जा सकते हैं।

मुहूर्त के अनुसार करें सोने-चांदी की खरीदारी 

अक्षय तृतीया पर आभूषण, सोना-चांदी, हीरे-जवाहरात, जमीन, खेत, प्रॉपर्टी, मकान, कार, बाइक, इलेक्ट्रॉनिक आइटम खरीदने के लिए लग्नों के अनुसार इस बार कई शुभ मुहूर्त हैं। आचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि सोना, चांदी, जमीन, खेत, प्रॉपर्टी, मकान आदि खरीदने के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 7:03 से 9 बजे तक दोपहर 1:31 बजे से 3:45 बजे तक रात्रि 8:14 बजे से 10:32 बजे तक। इसके अलावा टीवी, फ्रिज, एसी, एलईडी, मोबाइल टीवी समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक्ससामान पूर्वाह्न 11:14 बजे से दोपहर 1:39 बजे तक और फिर दोपहर 3:45 बजे से गोधूलि बेला तक खरीदा जा सकता है।

जमदग्नि गोत्र वाले करें विशेष आराधना 

द्वापर युग में वैशाख शुक्ल तृतीया को जब भगवान परशुराम का अवतार हुआ तब छह ग्रह उसी राशि में थे। भगवान परशुराम के अवतार के समय पुनर्वसु नक्षत्र था। आचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि इसी दिन ब्राह्मण श्रेष्ठ भगवान परशुराम जयंती भी मनाई जाएगी। जिनका गोत्र जमदग्नि है वे विशेष पूजा कर पुण्य प्राप्त कर सकते हैं। 

त्रेता युग की शुरुआत का दिन

अक्षय तृतीया को ईश्वरीय तिथि माना भी कहा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन से त्रेतायुग का शुभारंभ हुआ था। इसीलिए इसे युगाब्दि तृतीया भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन किया गया जप, तप, दान, धर्म का पुण्य कभी भी नष्टï नहीं होता। किसी भी वस्तु का नाश न हो इसलिए अक्षय तृतीया मनाई जाती है।

पौराणिक मान्यताएं

अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु के परशुराम अवतार का जन्म हुआ था। पं.राधेश्याम शास्त्री ने बताया कि अक्षय तृतीया ही वो शुभ घड़ी थी जब भगवान नर-नारायण और भगवान विष्णु का हयग्रीव अवतार हुआ। परंपराओं के अनुसार, चार धामों में से एक श्री बद्रीनारायण के पट इसी दिन ही खुलते हैं। वृंदावन में बांके बिहारी के चरणों के दर्शन भी साल में एक बार इसी दिन ही होते हैं।

दान का क्षय नहीं होता

भविष्य पुराण के मुताबिक, अक्षय तृतीया को पुण्य तिथि भी कहा जाता है। आचार्य राकेश पांडेय ने बताया कि इस दिन गंगा स्नान विशेष फल देता है। सुबह स्नान के बाद भगवान नारायण का पूजन करने के बाद जल से भरा घटदान करना चाहिए। ग्रीष्मकालीन वस्तुओं के सथ ही मौसमी फल, सफेद मिष्ठान्न रहे तो उत्तम होगा। इस दिन संकल्पित दान भी करना चाहिए। इस दान का कभी क्षय नहीं होता। अक्षय तृतीया को सौभाग्य दिवस भी कहा जाता है। इस दिन परिवार की महिलाएं विशेष व्रत-पूजन से परिवार में सिद्धि लाती हैं। लोक मान्यताओं के अनुसार इसे लक्ष्मी सिद्धि दिवस भी कहते हैं।

शादी के साथ स्वार्थ सिद्धि योग 

18 अप्रैल को अक्षय तृतीया अबूझ मुहूर्त होने के साथ ही वैवाहिक लग्नों के होने के कारण इस दिन नगर में शादी बारातों की धूम रहेगी। सामूहिक यज्ञापवीत संस्कार के साथ ही सवार्थ सिद्धि योग का महासंयोग बन रहा है। इस दिन मांगलिक कार्य से विशेष पुण्य मिलेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग किसी शुभ कार्य को करने का शुभ मुहूर्त होता है। इस मुहूर्त में शुक्र अस्त, पंचक व भद्रा आदि पर विचार करने की जरूरत नहीं होती है। जैन समाज इस दिन को इक्षु तृतीया के रूप में मनाता है। डालीगंज के पाश्र्वनाथ जैन मंदिर में अभिषेक, शांतिधारा व भक्तांबर का पाठ करने के 48 नारियल चढ़ाए जाएंगे। मनकामेश्वर मंदिर में महंत देव्यागिरि की ओर से विशेष पूजन किया जाएगा। 

Posted By: Nawal Mishra