'चुनाव आयुक्त सही से नहीं कर पा रहे काम', EC में मतभेद की खबरों पर बोले अखिलेश यादव
चुनाव आयुक्तों द्वारा 10 महीनों में 14 बार आपत्ति दर्ज कराने की रिपोर्ट पर अखिलेश यादव ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव।
HighLights
दो चुनाव आयुक्तों ने 10 माह में 14 बार आपत्ति दर्ज की।
अखिलेश यादव ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
चुनाव आयोग ने मतभेदों के बावजूद सर्वसम्मति से निर्णय लेने की बात कही।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली/लखनऊ। चुनाव आयोग में मतभेद की खबरों पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी तंज कसा है। अखिलेश ने कहा कि चुनाव आयुक्त अपना काम सही से नहीं कर पा रहे हैं।
बता दें कि अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने बीते 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज कीं।
एक ही दिन में अधिकतम चार बार आपत्ति दर्ज की गई। ये आपत्तियां उन फैसलों और निर्देशों को लेकर थीं, जो उनके मुताबिक, उनकी सहमति के बिना जारी किए गए।
अखिलेश ने ट्वीट कर कसा तंज
अखिलेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्वीट करते हुए कहा कि ये एक बेहद गंभीर समाचार है कि पिछले 10 महीनों में 2 चुनाव आयुक्तों ने निर्वाचन आयोग के गलत निर्णयों पर 14 बार अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। इसका सीधा मतलब ये है कि सभी चुनाव आयुक्त अपना सही काम नहीं कर पा रहे हैं।
कहा कि एक स्वतंत्र निकाय के सदस्यों को अगर न्यायपूर्ण कार्य करने की स्वतंत्रता नहीं है या उनकी कोई सुनवाई नहीं है तो ये लोकतंत्र के लिए बेहद घातक और खतरनाक हालात हैं। कुछ लोगों द्वारा सत्ता की कठपुतली बनकर लोकतंत्र को धोखा देना घोर सांविधानिक अपराध है। ये लोकतंत्र को मिटाने के किसी षड्यंत्र से कम नहीं है।
ये एक बेहद गंभीर समाचार है कि पिछले 10 महीनों में 2 चुनाव आयुक्तों ने निर्वाचन आयोग के गलत निर्णयों पर 14 बार अपनी आपत्ति दर्ज़ कराई है।
इसका सीधा मतलब ये है कि सभी चुनाव आयुक्त अपना सही काम नहीं कर पा रहे हैं। एक स्वतंत्र निकाय के सदस्यों को अगर न्यायपूर्ण कार्य करने की… pic.twitter.com/UoQnYWsWd8
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) September 23, 2026
रिपोर्ट में क्या है?
रिपोर्ट में जानकारी दी गई कि चुनाव आयोग के अंदर दो चुनाव आयुक्तों की जानकारी के बिना उन मामलों पर फैसले लिए गए, जिन पर उन दोनों चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी।
रिपोर्ट में बताया गया कि जून 2025 में भारतीय चुनाव आयोग ने बिहार से SIR की शुरुआत की। इसके बाद 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13 करोड़ से ज्यादा नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर हुए। इसी प्रक्रिया के दौरान नए वोटर्स के रजिस्ट्रेशन, पुराने वोटर्स के नाम और अपीलों से जुड़े कई सवाल सामने आए। आयोग के भीतर भी इसी दौरान असहमति दर्ज होने लगी।
इस मामले पर चुनाव आयोग ने सफाई देते हुए कहा है कि ECI में मतभेदों के बावजूद सर्वसम्मति से फैसले लिए जाते हैं।
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