कांग्रेस के गढ़ से अखिलेश का शक्ति प्रदर्शन, 'PDA यात्रा' में गठबंधन और बागियों को दिया सियासी संदेश
अखिलेश यादव ने कांग्रेस के गढ़ रायबरेली से 'पीडीए रथ यात्रा' शुरू कर गठबंधन और बागी नेताओं को कई सियासी ...और पढ़ें

बछरावां में लोगों का अभिवादन करते सपा प्रमुख अखिलेश यादव।
HighLights
अखिलेश ने कांग्रेस के गढ़ रायबरेली से 'पीडीए रथ यात्रा' शुरू की।
सीट बंटवारे से पहले कांग्रेस को सपा की ताकत का अहसास कराया।
बागी नेताओं के जाने के बाद संगठन में नई ऊर्जा का संचार किया।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कांग्रेस के प्रभाव वाले रायबरेली से पीडीए रथ अभियान की शुरुआत कर कई राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की।
राहुल गांधी की लोकसभा सीट वाले जिले में जनशक्ति जुटाकर सपा ने सीट बंटवारे को लेकर संभावित बातचीत से पहले कांग्रेस को विधानसभा स्तर पर अपनी ताकत का अहसास कराने और संगठन में नई ऊर्जा भरने का प्रयास किया है। साथ ही मनोज पांडेय, राकेश प्रताप सिंह और अभय सिंह जैसे बागी नेताओं के अलग होने के बाद पार्टी के मजबूत रहने का संदेश दिया।
बागियों को अखिलेश यादव का संदेश
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने रायबरेली की छह में से चार सीटें जीती थीं। इनमें ऊंचाहार से जीते मनोज पांडेय अब भाजपा में हैं। 2024 के राज्यसभा चुनाव में मनोज, गौरीगंज के विधायक राकेश और गोसाईंगंज के अभय ने भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी।

इसके बाद सपा ने तीनों को निष्कासित कर दिया। अखिलेश भी बिना नाम लिए इन नेताओं को दोबारा अपनी सीटों पर जीत दर्ज न कर पाने का संदेश दे चुके हैं। इस लिहाज से पीडीए रथ यात्रा, संगठन की ताकत दिखाने का अवसर बनाई।
लोधी और पासी मतदाताओं में पकड़ मजबूत करने की कोशिश
रायबरेली का चयन जातीय समीकरण के लिहाज से महत्वपूर्ण है। बछरावां, हरचंदपुर में लोधी और पासी मतदाताओं की बड़ी मौजूदगी है। अखिलेश ने अपने दौरे में इन वर्गों में पकड़ मजबूत करने की कोशिश की।
वहीं हाल में फिरोज गांधी डिग्री कालेज में छात्रसभा और एबीवीपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई थी। उसके बाद सपा प्रमुख का विधायक राहुल लोधी के था पहुंचना, संगठन में उत्साह भरने का प्रयास भी है।
रायबरेली से रथ की शुरुआत सबसे ज्यादा गठबंधन की राजनीति के लिहाज से अहम है। सपा का शक्ति प्रदर्शन संभावित सीट बंटवारे की बातचीत में अपनी ताकत सामने रखने का संदेश देता है।
कांग्रेस वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को आधार बनाकर विधान सभा सीटों पर दावेदारी मजबूत करना चाहेगी, जबकि सपा 2022 में मिली 111 सीटों और संगठन को आधार बना रही है। सपा का संकेत है कि विधानसभा सीटों का बंटवारा केवल लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन के आधार पर नहीं होना चाहिए।
