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समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बताया गद्दी और कुर्सी का फर्क, बोले- हमको गद्दी नहीं कुर्सी चाहिए

Published: Mon, 26 Oct 2026 05:12 PM (IST)

Akhilesh Yadav: उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने अपने सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण मजबूत करने की कोशिश तेज कर दी है।

HighLights

  1. सपा मुखिया अखिलेश यादव बोले-गद्दी पर बैठते हैं साधु-संत और कुर्सी पर बैठते हैं शासक

  2. सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था, UP की जो गद्दी है वह अखिलेश यादव नहीं पा सकते

  3. पीडीए के लगातार विस्तार में जुटी समाजवादी पार्टी, पासी और प्रजापति सहित कई नेता हुए शामिल

  4. अखिलेश बोले- नए साथियों के आने से पूरब से पश्चिम तक हिल गया है, पीडीए की जीत और बड़ी होगी

  5. मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप, चुनाव आयोग से आधार और बायोमेट्रिक सत्यापन की व्यवस्था करने की मांग

डिजिटल डेस्क, लखनऊ : समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीते दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक बयान पर सोमवार को जवाब दिया। इसके साथ ही उन्होंने गद्दी और कुर्सी का भी फर्क साफ किया।

समाजवादी पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में सोमवार को अखिलेश यादव से एक पत्रकार ने पूछा कि मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि इनको 2027 में गद्दी नहीं मिलेगा और आगे भी पाने के लिए तरस जाएंगे, आप को क्या कहना है।

इसके जवाब में सपा प्रमुख ने कहा कि भाई हम कोई साधु-संत थोड़ी है जो हमको गद्दी चाहिए, हमें तो कुर्सी चाहिए। कुर्सी इसलिए चाहिए जिससे कि हम जनता की सेवा कर सके जनता के लिए काम कर सकें। उन्होंने कहा कि शासक तो कुर्सी पर बैठते हैं और साधु-संत गद्दी पर बैठकर ध्यान लगाते हैं।

सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण को दे रहे मजबूती

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने अपने सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण मजबूत करने की कोशिश तेज कर दी है। सपा प्रदेश मुख्यालय में सोमवार को पूर्व आइएएस राम बहादुर पासी, बसपा के पूर्व लोकसभा प्रत्याशी दारा सिंह प्रजापति, पूर्व विधायक कुशाग्र सागर और सिनोद कुमार शाक्य सहित कई नेताओं ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि इनके आने से पूरब से पश्चिम तक राजनीतिक हलचल मच गई है। पीडीए की जीत और बड़ी होने जा रही है।

सपा की नजर इस दल-बदल के जरिए दलित और पिछड़े वर्गों के बीच अपनी पकड़ बढ़ाने पर है। पूर्व आइएएस राम बहादुर पासी प्रशासनिक सेवा में गोंडा के जिलाधिकारी और लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा था। वर्ष 2017 में उन्होंने बसपा के टिकट पर मोहनलालगंज सुरक्षित विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। बाद में वह भाजपा में शामिल हो गए थे। अब उनका सपा में आना पार्टी की पीडीए रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बदायूं की राजनीति से जुड़े पूर्व विधायक कुशाग्र सागर और सिनोद कुमार शाक्य के शामिल होने से सपा को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ रुहेलखंड क्षेत्र में भी राजनीतिक लाभ की उम्मीद है। वहीं, दारा सिंह प्रजापति के जरिए पार्टी पिछड़े वर्गों में अपना आधार मजबूत करने की कोशिश में है।

चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पत्रकार वार्ता में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि सूची में सुनीता पत्नी राजकुमार के नाम से 2341 प्रविष्टियां मिली हैं। इनमें 420 प्रविष्टियों में उम्र भी समान 42 वर्ष दर्ज है। इसी तरह राजकुमारी पत्नी राजकुमार के नाम से 42 वर्ष की उम्र में 315 और अन्य छह समान आयु वर्गों में कुल 1627 प्रविष्टियां होने का दावा किया।

उन्होंने सवाल किया कि जब सपा सीमित संसाधनों में ऐसी गड़बड़ियां पकड़ सकती है तो चुनाव आयोग ऐसा क्यों नहीं कर पा रहा है। अखिलेश ने मतदाता सूची को आधार से जोड़ने और मतदान केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन की व्यवस्था लागू करने की मांग भी की।

अपने रावण और घुसपैठिया संबंधी बयान पर सफाई देते हुए अखिलेश ने कहा कि उनकी टिप्पणी मुख्यमंत्री के संदर्भ में थी। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए सामाजिक न्याय के मुद्दे को आगे बढ़ाने की बात कही। अखिलेश ने घोषणा की कि सपा की सरकार बनने पर महर्षि वाल्मीकि जयंती पर अवकाश दिया जाएगा। गरीब परिवारों के लिए आधुनिक आवास बनाने और उन्हें घर उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने का भी वादा किया।

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