लखनऊ, [निशांत यादव]। जिला पंचायत और विधानसभा चुनाव के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद से ही समाजवादी पार्टी का जिला संगठन निशाने पर आ गया था। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार सुबह अचानक प्रदेश अध्यक्ष को छोड़कर शेष सभी इकाइयां भंग कर दी। जिला के साथ महानगर संगठन अब नए सिरे से तैयार होगा। नए नगर अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष की दौड़ में कई पुराने चेहरे शामिल हैं। सपा के सक्रिय सदस्यों की सदस्यता 30 जून को ही समाप्त हो गई थी। तब से ही संगठन के भंग होने के कयास लग रहे थे।

समाजवादी पार्टी के जिला संगठन में गुटबाजी कई जगह देखने को मिली थी। जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में पार्टी अपना पिछला प्रदर्शन नहीं दोहरा सकी थी। तीन सीटों पर पार्टी के ही कार्यकर्ता एक दूसरे के खिलाफ लड़ गए थे। इसके बावजूद सबसे अधिक आठ सदस्य सपा के होने के बाद भी क्रॉस वोटिंग में पार्टी की विजय लक्ष्मी को जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। विधानसभा चुनाव में ग्रामीण की चारों सीट सपा गुटबाजी के चलते हारी। मलिहाबाद में स्वामी प्रसाद मौर्य के सामने पार्टी के दो गुटों में जमकर मारपीट तक हो गई।

जिला संगठन के कई पुराने नेताओ ने उपेक्षा का आरोप लगाकर संगठन से दूरी बना ली। अब नए जिलाध्यक्ष की दौड़ में पूर्व विधायक राजेन्द्र यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष अशोक यादव, विजय सिंह जैसे नेताओं के नाम चल रहे हैं। इसी तरह महानगर संगठन में भी नगर निगम के चुनाव को देखते हुए बदलाव किया जाएगा। पिछले साल नगर निगम पर प्रदर्शन के समय पुराने नेता रविदास मेहरोत्रा को फ़ोटो खिंचवाने के लिए अपने सामने से हटाने के मामले में नगर अध्यक्ष सुशील दीक्षित को आला कमान ने फटकार भी लगाई थी।

अखिलेश यादव से निकटता के चलते मुजीबुर्रहमान बबलू, मुकेश शुक्ल के साथ सुशील दीक्षित भी नगर अध्यक्ष की दौड़ में शामिल हैं। नए महानगर अध्यक्ष पर संगठन को दोबारा तैयार कर नगर निगम चुनाव कराने की जिम्मेदारी होगी। माना जा रहा है कि अखिलेश यादव पुराने चेहरों पर फिर से भरोसा जता सकते हैं।

Edited By: Vikas Mishra