लखनऊ, जेएनएन। लोकसभा चुनाव 2019 में अपनी जीत की खातिर नेताओं ने अपने चेलों को भी सक्रिय कर रखा था। भोपाल से भाजपा की साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ मैदान में उतरे पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह की जीत की खातिर तो तमाम बाबा भी सक्रिय थे। दिग्गी राजा की जीत के लिए हवन करने वाले मिर्ची बाबा को अखाड़ा परिषद ने निरंजनी अखाड़ा से निष्कासित कर दिया है।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरी ने कहा कि स्वामी वैराग्यानंद उर्फ मिर्ची बाबा का का कार्य गलत था। उनका आचरण साधु-संतों की मर्यादा के खिलाफ था। भोपाल लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की जीत का हवन करने वाले स्वामी वैराग्यानंद उर्फ मिर्ची बाबा को निरंजनी अखाड़े से निष्कासित कर दिया गया है। मिर्ची बाबा पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के महामंडलेश्वर थे। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह को हराने के लिए हवन किया था। उन पर राजनीतिक बयानबाजी करने का भी आरोप लगा था। 

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरी ने कहा कि स्वामी वैराग्यानंद का कार्य गलत था. उनका आचरण साधु-संतों की मर्यादा के खिलाफ था। उन्होंने बताया कि अखाड़े के पंच परमेश्वर की बैठक के बाद उन्हें निष्कासित करने का निर्णय लिया गया। महंत नरेंद्र गिरी ने बताया कि किसी के अहित के लिए पूजा कराना गलत है। संत के तौर पर उन्होंने राजनीतिक विद्वेष से ग्रसित होकर दिग्विजय सिंह की जीत और साध्वी प्रज्ञा की हार के लिए पूजा अनुष्ठान किया था। स्वामी वैरागानंद के कई आश्रम गुजरात और मध्य प्रदेश में हैं। स्वामी वैराग्यानंद को दिग्विजय सिंह का करीबी बताया जाता है। वैराग्यानंद ने चुनाव के दौरान कई क्विंटल लाल मिर्ची का हवन करवाया था। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया था कि अगर दिग्विजय सिंह हार जाएंगे तो वह समाधि ले लेंगे।अब लोग उनसे समाधि लेने की भी मांग करने लगे हैं। 

दिग्विजय सिंह के चुनाव हार जाने के बाद सोशल मीडिया पर स्वामी वैराग्य नंद की उनकी इस घोषणा को लेकर खूब खिल्ली उड़ाई जा रही और उन्हें जमकर ट्रोल किया जा रहा है। अखाड़े ने उनकी महामंडलेश्वर की पदवी भी वापस ले ली है।

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Posted By: Dharmendra Pandey

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