लखनऊ, जेएनएन। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका वाड्रा आखिरकार अपने मन का कर ही गईं। करीब 26 घंटे चले सियासी घमासान के बाद चुनार के किले में प्रियंका वाड्रा सोनभद्र कांड के पीड़ितों से मिलीं और अंत में बोलीं...मेरा मकसद पूरा हुआ।

वाकई प्रियंका गांधी का मकसद पूरा हो गया। लोकसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेसियों में जो मायूसी थी, वह सोनभद्र नरसंहार के बाद प्रियंका के इस कदम से कार्यकर्ताओं में नई जान फूंक गईं। मीरजापुर से लेकर राजधानी लखनऊ तक में कांग्रेसी नेता सक्रिय हो गए। अमूमन सुनसान रहने वाले कांग्रेस कार्यालय भी गुलजार हो गए। लखनऊ में राजभवन से लेकर सड़कों तक में कांग्रेसी संघर्ष करते नजर आए।

आखिरकार झुकी प्रदेश सरकार

सूबे में कांग्रेस के फिर से पैर जमाने के लिए यूूं तो प्रियंका इधर लगातार सक्रिय हैं, लेकिन सोनभद्र की घटना को लेकर राज्य सरकार के रुख ने राजनीतिक रूप से कांग्रेस को फायदा ही पहुंचाया है। प्रियंका को भी यह नहीं पता था कि सोनभद्र के पीड़ितों से मिलने में जो रुकावट पैदा की जा रही है, वह कांग्रेस के लिए आगाज बनेगी। यूपी की सियासत में प्रियंका के लिए भी चुनार का किला यादगार बन गया। उन्होंने अपनी जिद के आगे प्रशासन को झुका दिया। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता व पूर्व सांसद प्रमोद तिवारी कहते हैं कि प्रियंका गांधी के संघर्ष ने प्रदेश सरकार को झुका दिया। प्रियंका की दोनों मांगें पूरी हो गईं। वह न सिर्फ पीडि़तों से मिलीं, बल्कि उन्हें बिना शर्त रिहा किया गया।

कांग्रेस लड़ेगी वनवासियों की लड़ाई : प्रियंका

पीड़ितों से मुलाकात के बाद प्रियंका ने कहा कि मैं पीडि़तों के आंसू पोछने आई थी और संवेदनहीन योगी सरकार ने पूरे मामले को राजनीतिक रंग दे दिया। उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस मृतकों के परिवारीजनों को दस-दस लाख रुपये देगी और वनवासियों की लड़ाई लड़ेगी। पीडि़तों ने सच्चाई बताई है, वे डर के साये में जी रहे हैं। उनके रिश्तेदारों को भी गांव में घुसने नहीं दिया जा रहा है। पीडि़तों को सुरक्षा देना सरकार का काम है। इन्हें जमीन का मालिकाना हक दिया जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। जाने से पहले प्रियंका बोलीं, मेरा काम पूरा हुआ।

यह है मामला

17 जुलाई को सोनभद्र के घोरावल थाना क्षेत्र स्थित उभ्भा गांव में काबिज वनवासियों को हटाने के लिए मूर्तिया के ग्राम प्रधान यज्ञदत्त ने 300 लोगोंं के साथ हमला किया था। खूनी संघर्ष में दस लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई घायल हो गए थे। मामले में 28 को नामजद करने के अलावा 50 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। प्रधान व भदोही रेलवे स्टेशन अधीक्षक कोमल सिंह सहित 27 की गिरफ्तारी हो चुकी है।

Posted By: Umesh Tiwari

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