लखनऊ, जेएनएन। अयोध्या में रामजन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मुस्लिम पक्ष बंटा नजर आने लगा है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इसे अनुचित बताते हुए नामंजूर कर दिया है। रविवार को लखनऊ में बोर्ड की कार्यकारिणी ने अहम बैठक कर निर्णय लिया है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मुस्लिम पक्ष पुनर्विचार याचिका दायर करेगा। बोर्ड ने मस्जिद के लिए पांच एकड़ भूमि अन्यत्र लेने से भी यह कहते हुए इन्कार कर दिया कि यह शरीयत के खिलाफ है। हालांकि मुस्लिम पक्ष के पक्षकार इकबाल अंसारी ने कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हुए कहा है कि वह पुनर्विचार याचिका दाखिल करने के निर्णय से सहमत नहीं है।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक रविवार को नदवातुल उलमा में होनी थी, लेकिन प्रशासन से अनुमति न मिलने की वजह से डालीगंज स्थित मुमताज पीजी कॉलेज में हुई। बोर्ड में पचास सदस्य हैं, जिनमें लगभग 35 सदस्यों के अतिरिक्त विशेष आमंत्रित मुस्लिम नेता भी शामिल हुए। करीब तीन घंटे तक चली बैठक में उच्चतम न्यायालय के फैसले के तमाम बिंदुओं की समीक्षा की गई। बैठक के बाद पत्रकारों से वार्ता में बोर्ड के सचिव और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी ने कहा कि मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंजूर नहीं है। यह महसूस किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में कई बिंदुओं पर न केवल विरोधाभास है, बल्कि प्रथमदृष्टया अनुचित प्रतीत होता है।

बोर्ड के सचिव मौलाना उमरेन महफूज रहमानी ने तर्क दिया कि शरीयत के अनुसार हम मस्जिद के एवज कोई वस्तु या जमीन नहीं ले सकते। लिहाजा, हम अयोध्या में बाबरी मस्जिद के बदले पांच एकड़ जमीन स्वीकार नहीं कर सकते। बाबरी मुस्लिम एक्शन कमेटी के सह संयोजक कासिम रसूल इलियास ने बताया कि हम फैसले के 30 दिन के अंदर पुनर्विचार याचिका दाखिल कर देंगे।

तीन पक्षकारों ने दी सहमति

जफरयाब जिलानी का दावा है कि पुनर्विचार याचिका दायर करने के लिए तीन पक्षकारों की सहमति मिल गई है। पक्षकार मौलाना महफुजर्रहमान, मो. उमर और मिसबाहुद्दीन हमारे साथ हैं। पक्षकार जमीयत उलमा हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने भी पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की घोषणा की है।

दबाव में होंगे इकबाल अंसारी

अब पक्षकारों में सिर्फ इकबाल अंसारी बचे हैं। वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सहमत हैं। इस बारे में पूछने पर जफरयाब जिलानी का कहना था कि अयोध्या में पुलिस प्रशासन किसी को इस फैसले के खिलाफ बोलने नहीं दे रहा। हो सकता है कि इकबाल अंसारी भी दबाव में हों।

मदनी ने बीच में छोड़ी बैठक

जमीअत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड बैठक को बीच में ही छोड़ वापस लौट गए। मीडिया ने उनसे बात करने की कोशिश की, लेकिन वह चुप रहे। उनके बैठक छोड़ने को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। बोर्ड के अन्य सदस्यों से सवाल किया गया, तो उन्होंने आंतरिक मामला बताकर जवाब देने से इंकार कर दिया। दूसरी ओर बोर्ड के उपाध्यक्ष व वरिष्ठ शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक बैठक में शामिल नहीं हुए।

आधा घंटे पहले बदली बैठक की जगह

गहमागहमी के बीच ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक का स्थान ऐन वक्त पर बदल दिया गया। पहले यह आयोजन नदवातुल उलमा में होना था। ठीक आधा घंटे पहले इसे मुमताज पीजी कॉलेज में शिफ्ट कर दिया गया। रविवार को सुबह दस बजे डालीगंज के नदवातुल उलमा में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की कार्यकारिणी की बैठक प्रस्तावित थी। अचानक जगह बदलने से बैठक एक घंटे देरी से शुरू हो सकी। बैठक की अध्यक्षता करने वाले बोर्ड अध्यक्ष मौलाना राबे हसनी नदवी करीब 12 बजे पहुंचे। बैठक खत्म होने के बाद बोर्ड के सचिव एडवोकेट जफरयाब जिलानी व सदस्य डॉ. कासिम रसूल इलियास सहित अन्य लोगों ने प्रेस वार्ता में जिला प्रशासन व पुलिस की निंदा की। जफरयाब जिलानी ने जिला प्रशासन व पुलिस पर दबाव बनाने आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रशासन मुस्लिम पक्ष की फैसले के खिलाफ उठ रही आवाज को दबाने की कोशिश कर रहा है, जबकि यह हमारा संवैधानिक अधिकार है।

Posted By: Umesh Tiwari

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