लखनऊ, जेएनएन।  लोहिया अस्पताल में रेफर बच्चों की भर्ती पर रोक लग गई है। वहीं मातृ-शिशु अस्पताल में इमरजेंसी शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में दूर-दराज से आए गंभीर बच्चे केजीएमयू के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

दरअसल, लोहिया संस्थान में लोहिया अस्पताल का विलय हो गया है। ऐसे में संस्थान प्रशासन अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग व बाल रोग विभाग को मातृ-शिशु रेफरल अस्पताल में शिफ्ट कर रहा है। लिहाजा, अस्पताल में ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक आने वाले बच्चों को भर्ती करने से इन्कार किया जा रहा है। उन्हें ओपीडी के वक्त भर्ती के लिए शहीद पथ स्थित मातृ-शिशु रेफरल अस्पातल भेजा जा रहा है। वहीं इमरजेंसी में आए बच्चों को केजीएमयू टरकाया जा रहा है। लिहाजा, गंभीर बच्चों को समय पर इलाज मिलना मुश्किल है।

अस्पताल में बच्चों के 47 बेड: लोहिया अस्पताल में पीडियाटिक इमरजेंसी में छह बेड हैं। एसएनसीयू में 12 बेड हैं। वहीं 11 बेड एनआइसीयू के हैं। इसके अलावा वार्ड में 18 बेड हैं। इसमें सिर्फ अस्पताल में इमरजेंसी डिलिवरी के बच्चे भर्ती किए जाते हैं। दूसरे अस्पताल से रेफर बच्चों की भर्ती नहीं हो रही है। वार्ड में बेड खाली हैं। उधर, संस्थान के शहीद पथ स्थित मातृ-शिशु रेफरल अस्पताल में पीडियाटिक इमरजेंसी न होने से बच्चों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है।

पीजीआइ की तर्ज पर बीएससी नर्सिग :लोहिया संस्थान के बीएससी नर्सिग कोर्स के प्रस्ताव को गवर्निग बॉडी की बैठक में संशोधन के निर्देश दिए गए थे। ऐसे में संस्थान प्रशासन अब पीजीआइ की तर्ज पर बीएससी नर्सिग कोर्स का संचालन करेगा। वहीं 80 डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया भी शीघ्र शुरू की जाएगी।

लोहिया अस्पताल में इमरजेंसी में डिलिवरी की जा रही है। वहीं ओपीडी की पंजीकृत महिलाओं को प्रसव के लिए मातृ-शिशु रेफरल अस्पताल भेजना शुरू कर दिया गया है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को चक्कर लगाना पड़ रहा है।

लोहिया संस्थान के निदेशक डॉ. एके त्रिपाठी बाल रोग व स्त्री रोग विभाग शहीद पथ स्थित मातृ-शिशु अस्पताल में शिफ्ट किया जा रहा है। दोनों जगह सेवाएं मुहैया करा पाना मुश्किल है। ऐसे में लोहिया अस्पताल में पीडियाटिक रेफर केस नहीं लिए जा रहे हैं। मरीजों को शहीद पथ स्थित अस्पताल जाने की सलाह दी जा रही है।

 

Posted By: Anurag Gupta

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