लखनऊ [जितेंद्र उपाध्याय]। गरीब सवर्णो को 10 फीसद आरक्षण देने की प्राविधिक शिक्षा विभाग ने निर्णय लिया और इसके एवज में संस्थावार 10 फीसद सीटें बढ़ा दी गईं। सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी में आरक्षण देने के लिए भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ने भी सीटें बढ़ाने की हरी झंडी भी दे दी। उन्हें क्या पता था कि पहले से मौजूद सीटों को भरने की चुनौती होगी। नौ चरण पूरे होने के बावजूद अभी भी आरक्षण की सीटें खाली हैं। कोरोना संक्रमण का असर ऐसा रहा कि निजी संस्थानों में अंतिम चरण तक एक लाख से अधिक सीटों पर प्रवेश का इंतजार है। सरकारी संस्थानों में भी दो हजार से अधिक सीटों पर अभी प्रवेश होने हैं। पांच दिसंबर तक प्रवेश प्रक्रिया समाप्त हो रही है। ऐसे में सीटों का भर पाना परिषद के सामने बड़ी चुनौती है।

पहली बार बिना परीक्षा के दिया गया मौका

संयुक्त प्रवेश परीक्षा की मेरिट के आधार पर ही प्रवेश केे प्रावधानों के बावजूद कोरोना संक्रमण के चलते पहली बार परीक्षा से वंचित डेढ़ लाख आवेदकों को प्रवेश का मौका दिया गया। काउंसिलिंग के लिए तीन अतिरिक्त चरण हुए। इसके बावजूद सीटें नहीं भर सकीं हैं। परिषद के साथ ही संस्थानों के प्रधानाचार्य भी हैरान हैं।

आठवें चरण के बाद रिक्त सीटों पर एक नजर

  • 150 सरकारी-8019- सवर्णो के लिए आरक्षित रिक्त सीटें-2547
  • 19 अनुदानित-2958-सवर्णो के लिए आरक्षित रिक्त सीटें-717
  • 1202 निजी-123682-सवर्णो के लिए आरक्षित रिक्त सीटें-15836

संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद के सचिव एसके वैश्य ने बताया कि कोरोना संक्रमण के चलते कुछ नए निर्णय लिए गए इसके बावजूद सीटें खाली हैं। पारदर्शी प्रवेश प्रक्रिया का भी असर रहा है। संस्थान मनमाना प्रवेश नहीं ले सकें हैं। अभी एक चरण बाकी है, आशा है कि काफी सीटें भर जाएंगी। रही बात सवर्ण आरक्षण की तो प्रमाण पत्र न बन पाने के कारण भी इसमे प्रवेश नहीं हो सके हैं।

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