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मदरसों में चंदा वसूलने का मामला सामने आने पर शासन सख्त, तीन दिन में मांगी रिपोर्ट

Published: Fri, 11 Sep 2026 06:21 PM (IST)

Illegal Donations For Madarsa: सरकार और जांच एजेंसियां यह सुनिश्चित करने में लगी हैं कि मदरसों को मिलने वाला दान, ...और पढ़ें

अनुदानित मदरसों में भी अवैध धन उगाही का प्रकरण सामने आया

अनुदानित मदरसों में भी अवैध धन उगाही का प्रकरण सामने आया

HighLights

  1. चंदा, जकात, सदका और फितरा के नाम पर धन एकत्र करने का मामला

  2. प्रदेश में राज्य सरकार से अनुदानित हैं राज्य 558 मदरसे

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। राज्य से अनुदान प्राप्त करने वाले मदरसों में भी अवैध धन उगाही का प्रकरण सामने आया है। इस मामले का संज्ञान लेते हुए शासन ने सख्ती दिखाई है। तीन दिन में जिलों से रिपोर्ट मांगी गई है।

चंदा, जकात, सदका और फितरा के नाम पर धन एकत्र करने की शिकायत पर शासन ने सख्ती दिखाई है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों (डीएमओ) ने मदरसों के प्रबंधकों से तीन दिन में चंदा संग्रह और उसके इस्तेमाल का पूरा ब्योरा तलब किया है। राज्य में 558 अनुदानित मदरसे हैं, इनमें से कई पर चंदा लेने का आरोप है।

मदरसा प्रबंधकों से पूछा गया है कि कितने संस्थान चंदा या अन्य प्रकार के दान एकत्र कर रहे हैं। इसके लिए कोई वैधानिक प्रविधान अथवा सक्षम प्राधिकारी की अनुमति है या नहीं, इसकी जानकारी भी मांगी गई है। चंदे की रसीद पुस्तिकाओं, प्राप्त धनराशि, उसके खर्च और पिछले पांच वर्षों के लेखा-परीक्षण से संबंधित विवरण भी उपलब्ध कराने को कहा गया है।

प्रबंधकों से आयकर कानून, विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) समेत अन्य वित्तीय और वैधानिक प्रावधानों के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है। साथ ही यह भी जानकारी मांगी गई है कि चंदे के रूप में प्राप्त धनराशि किस खाते में जमा की जाती है और उसका उपयोग किन मदों में किया जाता है। अभिलेखों के रखरखाव और धनराशि के लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा सकती है।

इस बात की पड़ताल भी हो रही है कि सरकारी वेतन पाने वाले शिक्षक चंदा संग्रह में शामिल हैं या नहीं। यदि शिक्षक इस तरह की गतिविधियों में संलिप्त पाए जाते हैं तो उनके स्तर पर भी जिम्मेदारी तय की जा सकती है। अब तीन दिन में मिलने वाली रिपोर्ट और दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। इंजीनियर तलहा अंसारी ने इस मामले की मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत की थी।

उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड की ओर से सूचना के अधिकार के तहत जवाब में यह सामने आया कि राज्य के 558 सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों में चंदे के संग्रह को नियंत्रित करने के लिए नियमों में कोई स्पष्ट प्रावधान या निज़ाम दर्ज नहीं है। इस खुलासे और कथित वित्तीय अनियमितताओं के बाद प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच प्रक्रिया तेज कर दी है।

सरकार और जांच एजेंसियां यह सुनिश्चित करने में लगी हैं कि मदरसों को मिलने वाला दान, विदेशी फंडिंग या अन्य आर्थिक संसाधन पूरी तरह पारदर्शी हों और नियमों के दायरे में आएं। अनियोजित या संदिग्द वित्तीय स्रोतों को लेकर शासन स्तर पर लगातार समीक्षा और कार्रवाई की जा रही है।