लखनऊ (जेएनएन)। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा कि यूपी विधानसभा चुनाव में फिलहाल किसी पार्टी से गठबंधन का फैसला नहीं किया गया है। पार्टी अकेले दम चुनाव की तैयारियां कर रही है। जदयू संग भी इस बारे में किसी तरह की बातचीत नहीं हुई है। पार्टी यूपी में सर्वे करा रही है। रिपोर्ट के बाद तय होगा कि हम यूपी में सभी सीटों पर लड़ें या कुछ पर।

वाराणसी में संजय सिंह आज पार्टी की ओर से बीएचयू में 24 घंटे लाइब्रेरी खोलने के समर्थन और निलंबित छात्रों की बहाली को लेकर पिछले दिनों आंदोलन के दौरान आप कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज के विरोध में आयोजित सद्बुद्धि रैली में भाग लेने काशी आए थे। आप नेता ने कहा कि अन्य राज्यों में पार्टी दमदारी से विधानसभा चुनाव लड़ेगी। पार्टी पंजाब और गोवा के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घर गुजरात में घुसकर चुनौती देने की पूरी तैयारी कर चुकी है।

वाटर टैंकर घोटाले में होगी प्राथमिकी

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के सवाल पर उन्होंने कहा कि वाटर टैंकर घोटाले की जांच रिपोर्ट 11 माह तक रखे जाने के बाद अचानक सामने लाने को लेकर विपक्ष का आरोप बेबुनियाद है। जांच रिपोर्ट पर समयबद्ध ढंग से कार्य हुआ। घोटाले में प्राथमिकी दर्ज होगी। ज्ञातव्य है कि टैंकर घोटाले में शीला दीक्षित को आरोपी बताया गया है।

पद छोडऩे को विवश किया राजन को

रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन के पद छोडऩे के सवाल पर उन्होंने कहा कि योग्य व्यक्ति को अपमानित कर पद छोडऩे को विवश किया जा रहा। महंगाई का स्तर आसमान छू रहा है। प्रधानमंत्री को विदेश दौरे से फुर्सत नहीं। 18 महीने से लगातार निर्यात घटा है।

भ्रष्टाचार मुक्त का खोखला दावा

संजय सिंह ने कहा कि देश की सरकार भगोड़े उद्यमी विजय माल्या की तलाश में जुटी है, जबकि वह विदेश में पुस्तक विमोचन समारोह में मौजूद मिला। वहां भारतीय उच्चायुक्त भी बतौर अतिथि शामिल रहे। प्रधानमंत्री देश को भ्रष्टाचार मुक्त होने का खोखला दावा कर रहे हैं। व्यापम घोटाला, माल्या मामला, एफटीआइआइ फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट आफ इंडिया में अयोग्य व्यक्ति की तैनाती, यह सब क्या है।

संसदीय सचिव अन्य राज्यों में भी, फिर दिल्ली में सवाल क्यों

आप के राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा कि दिल्ली के 21 विधायकों को संसदीय सचिव बनाने के मुद्दे को विपक्ष अनावश्यक तूल दे रहा है। इसके पूर्व भी दिल्ली में यह व्यवस्था रही है। पंजाब व नगालैंड में 24-24, और हिमाचल में भी छह विधायकों को संसदीय सचिव बनाया गया है। छत्तीसगढ़ में तो संसदीय सचिवों पर पांच साल में 50 करोड़ खर्च कर दिए गए। गुजरात में संसदीय सचिवों को सर्वाधिक सुविधा मुहैया है। संजय सिंह का कहना था कि फिर दिल्ली के लिए सवाल क्यों।

Posted By: Nawal Mishra

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