लखनऊ, जेएनएन। यूपी में चकबंदी विभाग के राजस्व विभाग में विलय के विरोध में गुरुवार को प्रदेश भर में अमीन, लेखपाल, कानूनगो, नायाब तहसीलदार और तहसीलदार बड़ा प्रदर्शन कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े संगठन राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद का आंदोलन को समर्थन मिला है। राजधानी लखनऊ कलेक्ट्रेट सहित  प्रदेश के सभी जिलाधिकारी कार्यालय में आज धरना-प्रदर्शन हो रहा है। लखनऊ की पांचों तहसीलों में कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। 

उत्तर प्रदेश राजस्व महासंघ से जुड़े अधिकारी व कर्मचारियों का कहना है कि चकबंदी विभाग के विलय से राजस्व विभाग का सबसे ज्यादा नुकसान होगा। इस आंदोलन में प्रदेश के 50 हजार से ज्यादा राजस्व कर्मी शामिल हुए हैं। साथ ही 750 तहसीलदार,1234 नायब तहसीलदार भी राजस्व महासंघ के आंदोलन में शामिल है। यूपी के 30837 लेखपाल भी विरोध कर रहे हैं। इस विरोध प्रदर्शन में 9634 अमीन, 4281 राजस्व निरीक्षक और 68 सहायक भू लेख अधिकरी भी शामिल हैं। अपनी मांगों को लेकर कर्मचारी गुरुवार को 350 तहसीलों में कार्य बहिष्कार पर हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुई तो कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। कर्मचारियों का कहना है कि चकबंदी विभाग के विलय से राजस्व विभाग का सबसे ज्यादा नुकसान होगा। समस्या घटने की बजाय बढ़ेंगी।

इसलिये कर रहे विरोध

प्रदेश सरकार का मानना है कि चकबंदी प्रक्रिया में बहुत विसंगतियां हैं। चकबंदी वादों के निस्तारण में विलंब होता है। पूरे विभाग में गुणात्मक सुधार की जरूरत है, इसलिए चकबंदी का राजस्व विभाग में विलय जरूरी है। चकबंदी विभाग का लाभ आम जन को मिले, इसके लिए चकबंदी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की जरूरत है। इसके लिए समायोजन ही प्रमुख रास्ता है। वहीं राजस्व कर्मी इस विलय के पक्ष में नहीं हैं। उनका मानना है कि जो स्वयं बिगड़ा हुआ है वह राजस्व में आकर उसे भी बिगाड़ देगा। राजस्व विभाग के अधिकारी 10 अक्टूबर से इसके खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया है। चकबंदी के अधिकारियों को राजस्व परिषद के अधीन प्रतिनियुक्ति पर तैनात किया जाना है, जिसका राजस्व कर्मी विरोध कर रहे हैं। इसके लिए राजस्व कर्मियों ने राजस्व महासंघ बना लिया है। इसमें प्रोन्नत डिप्टी कलेक्टर, राजस्व प्रशासनिक अधिकारी, मिनिस्ट्रीयल कलेक्ट्रेट संघ, लेखपाल संघ, संग्रह अमीन  शामिल हैं।

Posted By: Umesh Tiwari

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