जागरण संवाददाता, लखनऊ : बिजली विभाग से एक सामान्य उपभोक्ता को घरेलू कनेक्शन लेने के लिए कई औपचारिकताएं करनी पड़ती हैं। कनेक्शन के बाद समय पर बिल भी जमा करना होता है। अन्यथा बकाया होते ही आपका कनेक्शन कट सकता है। यह सारे नियम एक सामान्य उपभोक्ता पर लागू होते हैं, लेकिन राजधानी में सात साल पहले राज्य संपत्ति विभाग के नाम से सौ किलोवॉट व दो सौ किलोवॉट के कनेक्शन हुए। खासबात है कि सात साल में यहां से बिजली बिल के सात रुपये भी जमा नहीं किए गए। अब 75 लाख बकाया होने पर बिजली कटी तो उक्त पते का मालिक बनने को कोई तैयार नहीं है।

बिजली महकमे के सूत्रों की माने तो वीआइपी एरिया स्थित इस बड़े भवन का इस्तेमाल कौन कर रहा है, इसकी जानकारी बिजली महकमे को आज तक नहीं है। वहीं स्थानीय लोग इस दावे को गलत ठहराते हैं। हालांकि आसपास रहने वाले लोग दावा करते हैं कि बिजली महकमे के बडे़ अफसरों को सब पता है लेकिन वह लाखों रुपये बकाया होने के बाद भी कनेक्शन नहीं काट सके, क्योंकि भवन में एक राजनीतिक पार्टी का कार्यालय चलता है। खासबात यह है कि इतना बकाया होने के बाद भी सात साल में एक बार भी बिजली नहीं कटी। वहीं बिजली विभाग की यह रकम कौन भरेगा, इसको लेकर अभी तक कोई निर्णय नहीं हुआ है।

राजभवन डिवीजन के अभियंताओं ने दावा किया है कि जब तक जिम्मेदारी राज्य संपत्ति विभाग नहीं लेगा, तब तक कनेक्शन नहीं जोड़ा जाएगा।

कई बार भीतर जाने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रवेश नहीं मिल सका। तमाम बार नोटिस भेजी गई। राज्य संपत्ति विभाग को भी समय-समय पर अवगत कराया गया। तीन दिन पहले दो कनेक्शनों पर करीब 75 लाख बाकी था। इस पर बिजली कनेक्शन काट दिया गया। अब राज्य संपत्ति विभाग के संबंधित अधिकारी मानने को तैयार नहीं है कि यह कनेक्शन उनके नाम है। जबकि बिजली महकमे के दस्तावेजों में आरएसए छह एलबी मार्ग दर्ज है। बिजली जोड़ी नहीं गई है।

अनिल कुमार, अधिशासी अभियंता, राजभवन

Posted By: Jagran

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