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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 12, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

प्रदेश का बड़ा अंधेरा उजागर, 55 हजार प्राइमरी स्कूलों में नहीं है बिजली कनेक्शन

By Umesh TiwariEdited By:
Published: Tue, 12 Mar 2019 03:31 PM (IST)Updated: Wed, 13 Mar 2019 09:02 AM (IST)

लोकसभा चुनाव की घोषणा होने के बाद पोलिंग बूथ की तैयारियों में ही यह पोल खुली है कि उत्तर प्रदेश ...और पढ़ें

प्रदेश का बड़ा अंधेरा उजागर, 55 हजार प्राइमरी स्कूलों में नहीं है बिजली कनेक्शन
प्रदेश का बड़ा अंधेरा उजागर, 55 हजार प्राइमरी स्कूलों में नहीं है बिजली कनेक्शन

लखनऊ, जेएनएन। जनता को 'सौभाग्य' के रूप में बिजली दे रही सरकार अब तक शायद अंधेरे में थी। घर-घर बिजली पहुंचाने की मुहिम के बीच बच्चों का तो यह दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि वे भीषण गर्मी में भी अब तक बिना पंखे-रोशनी के पढ़ाई कर रहे थे। लोकसभा चुनाव की घोषणा होने के बाद पोलिंग बूथ की तैयारियों में ही यह पोल खुली है कि प्रदेश के 55 हजार प्राइमरी-जूनियर विद्यालयों में बिजली कनेक्शन ही नहीं है। अब यहां कनेक्शन के निर्देश शासन ने दिए हैं।

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए पिछले दिनों बैठक बुलाई गई थी। उसमें पोलिंग बूथ बनाने के लिए प्राइमरी और जूनियर विद्यालयों की सूची मांगी गई। तब बिजली विभाग ने ही आंकड़ा पेश किया कि उत्तर प्रदेश के 55 हजार स्कूलों में अभी बिजली कनेक्शन नहीं है। लिहाजा, प्रमुख सचिव ऊर्जा आलोक कुमार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिन विद्यालयों के भवनों में बिजली कनेक्शन नहीं है, उनकी सूची तैयार कर ली जाए। वह सूची विद्युत वितरण निगमों के नोडल अधीक्षण अभियंताओं को दे दें। बेसिक शिक्षा विभाग धनराशि उपलब्ध करा दे, जिसके बाद प्राथमिकता से सभी विद्यालयों में अभियान चलाकर कनेक्शन करा दें।

बातें बड़ी-बड़ी पर स्थित समाने

उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि शिक्षा विभाग छात्रों को मूलभूत सुविधाएं देने की बड़ी-बड़ी बातें करता है लेकिन, स्थिति सामने है कि लाखों बच्चे बिना लाइट व पंखों के पढ़ाई कर रहे हैं।

ग्राम पंचायतों से होगा बकाया बिल का भुगतान

प्रमुख सचिव ने कहा कि जिन विद्यालयों का कनेक्शन बिल बकाया की वजह से काटा गया है, वहां ग्राम पंचायतें जिम्मेदारी निभाएं। चतुर्थ राज्य वित्त आयोग के निर्देशानुसार ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित 50 फीसद धनराशि का उपयोग पूर्व सृजित संपत्तियों के रखरखाव में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित परिषदीय प्राथमिक एवं प्राथमिक विद्यालयों में बिजली बिल का भुगतान इस निधि से किया जा सकता है। बकाया बिलों का तत्काल भुगतान कर दोबारा कनेक्शन कराए जाएं।