लखनऊ, [रूमा सिन्हा]। ऐशबाग स्थित जिस जमुना झील के अस्तित्व पर आज सवाल खड़े किए जा रहे हैं उसके निशां सेटेलाइट चित्रों में महफूज हैं। गूगल मैप में जमुना झील को साफ तौर पर देखा जा सकता है। झील की परिधि लगभग 1.8 किलोमीटर है। ऐशबाग में कब्रिस्तान व श्मशान घाट के बगल में मौजूद जमुना झील लगभग 500 साल पुरानी है। इसका पुराना नाम जमुनिया झील था जिसे बाद में जमुना झील कहा जाने लगा।

अंबेडकर विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग के प्रोफेसर डॉ. वेंकटेश दत्ता बताते हैं कि दरअसल जमुना झील मोती झील का ही हिस्सा थी जो बाद में अलग हो गई थी। वर्ष 2006 में झील के सुंदरीकरण का प्रस्ताव भी बनाया गया था। करीब 12 करोड़ रुपये खर्च कर घाट बनवाने के साथ पानी को साफ करने के लिए मशीन भी मंगवाई गई लेकिन काम पूरा होने से पहले ही बीच में रुक गया और झील की बदहाली दूर न हो सकी।

जल संस्थान के पूर्व महाप्रबंधक राजीव वाजपेयी बताते हैं कि मोती झील व जमुना झील एक ही हैं। इसमें आसपास का सीवर जाता था जिसे पाइप डालकर लेबर कालोनी के पास नाले में डायवर्ट किया गया। यही नहीं, ऐशबाग जलकल के बैक वाश का पानी भी झील में जाता था। झील के सुंदरीकरण की योजना बनी तो जल निगम ने इस पानी को साफ कर झील में डालने की योजना बनाई। यहां प्लांट भी लगाया गया लेकिन योजना सफल नहीं हुई। दूसरी तरफ झील की स्थिति और भी खराब होती गई।

शहर की अन्य झीलें भी संकट में

डॉ.वेंकटेश दत्ता कहते हैं कि जमुना झील ही नहीं शहर की अन्य झीलें भी अपने अस्तित्व के लिए लड़ाई लड़ रही हैं। कैंपवेल रोड और मोहान रोड के बीच स्थित काला पहाड़ झील बदहाली का शिकार है। रायबरेली रोड स्थित झील के सुंदरीकरण का काम एलडीए ने शुरू किया था। कुछ समय बाद काम बंद हो गया। आज झील बदहाल है।

तेलीबाग में विनायक झील गंदगी और मलबे से भरी है। एल्डिको उद्यान दो में करीब एक किमी लंबी झील बनवाई गई थी जो आज नाले में तब्दील हो चुकी है। डालीबाग के बटलर पैलेस झील की स्थिति भी बदतर होती जा रही है। हैवतमऊ मवैया झील अतिक्रमण का शिकार है। हैवतमऊ मवैया झील के चारों ओर कब्जा हो चुका है।

 

Posted By: Anurag Gupta

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप