लखनऊ, जेएनएन। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कक्षा एक में पढ़ने वाले 41.1 प्रतिशत बच्चे अक्षर भी नहीं पढ़ सकते हैं। इस कक्षा के 32.9 फीसद बच्चे अक्षर तो पढ़ सकते हैं, लेकिन शब्द नहीं। वहीं कक्षा तीन के 23.6 फीसद बच्चे अक्षर पढ़ने में नाकाम हैं। कक्षा एक के 28.1 प्रतिशत बच्चे एक से नौ तक अंक नहीं पहचानते तो कक्षा तीन में ऐसे 6.7 फीसद बच्चे हैं। कक्षा तीन के 53.8 फीसद बच्चे ही 11 से 99 तक के अंकों को पहचान सकते हैं।

एनुअल सर्वे ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट 2019 (असर) 'अर्ली इयर्स' रिपोर्ट में लखनऊ में बेसिक शिक्षा की यह तस्वीर उजागर हुई है। यह रिपोर्ट 4 से 8 वर्ष तक के बच्चों पर किये सर्वे पर केंद्रित है। यह सर्वे देश के 24 राज्यों के 26 जिलों में किया गया। उप्र में यह सर्वे लखनऊ और वाराणसी के 60 गांवों, 1207 परिवारों और इस आयु वर्ग के 1494 बच्चों के बीच किया गया। 

सर्वे में पाया गया कि लखनऊ में चार वर्ष के 33 फीसद बच्चे कहीं भी नामांकित नहीं या ड्रॉप आउट हैं। चार वर्ष के ही महज 3.4 फीसद बच्चे सरकारी सकूल में पढ़ रहे हैं जबकि निजी प्री स्कूल में लोअर व अपर केजी में इस उम्र के 49.8 प्रतिशत बच्चे पंजीकृत हैं। सात वर्ष के 33.1 फीसद बच्चे सरकारी तो 42.3 फीसद बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं जबकि 20.5 फीसद बच्चे निजी प्री स्कूल में नामांकित हैं। 

वाराणसी की स्थिति निराशाजनक

वहीं प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में कक्षा एक के 41.9 फीसद बच्चे अक्षर ज्ञान से वंचित हैं तो कक्षा तीन में ऐसे बच्चे 16.8 प्रतिशत हैं। कक्षा एक के 31.5 फीसद बच्चे सिर्फ अक्षर को पढ़ सकते हैं, उनसे बने शब्दों को नहीं तो कक्षा तीन में ऐसे 25.3 प्रतिशत बच्चे पाये गए हैं। वाराणसी में कक्षा एक के 31.2 फीसद बच्चे एक से नौ तक के अंक को नहीं पहचान सकते तो कक्षा तीन में सिर्फ 39.7 फीसद बच्चे ही एक से नौ तक के अंक को पहचानते हैं।

Posted By: Umesh Tiwari

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