लखनऊ, जागरण संवाददाता। मछली पालन व्यवसाय में निवेश करने और 14 माह में रकम दोगुना करने का झांसा देकर जालसाज ने चार लोगों से 33 लाख रुपये ऐंठ लिए। पीडि़तों की सम्मिलित तहरीर पर निजी कंपनी के निदेशक के खिलाफ विभूतिखंड कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है। इंस्पेक्टर चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि रायबरेली के वीरभानपुर निवासी आदित्य त्रिपाठी व्यवसायी हैं। उन्होंने बताया कि बीते नवंबर माह में उनके पास एक महिला ने फोन किया। उसने कहा कि वह माउंटेन एलाइज कंपनी से बोल रही है। उनकी कंपनी मछली पालन का व्यवसाय कराती हैं। इसके बाद उसने कंपनी के निदेशक विश्वनाथ निषाद से मिलने के लिए कहा। उनसे मुलाकात हुई तो कंपनी की स्कीम बताई।

विश्वनाथ निषाद ने कंपनी में निवेश के लिए कहा और 14 माह में रुपये दोगुना करने का दावा किया। आदित्य ने बताया उन्होंने और उनके दोस्त बृजभान सिंह, शिवेंद्र सिंह और सुरेंद्र ने सब ने मिलकर 33 लाख रुपये कंपनी में लगाए। कुछ एक माह तक तो कंपनी के निदेशक ने ब्याज के रुपये दिए उसके बाद बंद कर दिया। रुपयों की मांग पर विश्वनाथ टाल मटोल करने लगा। विरोध पर उसने फोन पर धमकी दी। विभूतिखंड स्थित उसके दफ्तर पहुंचे तो वहां ताला बंद मिला। इंस्पेक्टर विभूतिखंड ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।

फार्मा कोर्स के दाखिले के नाम पर दो युवकों से दो लाख ठगेः निजी मेडिकल इंस्टीट्यूट में डीफार्मा कोर्स में दाखिले का झांसा देकर जालसाजों ने इंदिरानगर बसंत विहार निवासी अनूप सिंह और उनके रिश्तेदार विवेक से दो लाख रुपये ठग लिए। तहरीर के आधार पर चिनहट पुलिस ने आरोपित वीपी सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। इंस्पेक्टर ने बताया कि अनूप सिंह की दोस्ती वीपी सिंह के थी। वीपी सिंह ने उनका एक निजी कालेज में दाखिला कराने की बात कही। अनूप सिंह ने खुद और रिश्तेदार विवेक का दाखिला कराने के लिए कहा। आरोप है कि दाखिले के नाम पर वीपी सिंह ने दो लाख रुपये ले लिए। दाखिला न होने पर रुपयों की मांग की तो वीपी सिंह ने धमकी दी। पुलिस ने पीडि़त की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया है।

एक लाख ठगी का आरोपः आलमबाग निवासी पवन गुप्ता मेडिकल स्टोर संचालक हैं। उन्होंने आदर्श क्रेडिट सोसाइटी के एजेंट रवींद्र पर एक लाख रुपये की ठगी का आरोप लगाते हुए तालकटोरा थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। इंस्पेक्टर के मुताबिक पवन कुमार का राजाजीपुरम में मेडिकल स्टोर है। उन्होंने वर्ष 2019 में रवींद्र क्रेडिट कार्ड कंपनी में एजेंट था। रवींद्र के माध्यम से पवन ने खाते खुलवाए थे। उसमें करीब एक लाख रुपये रवींद्र के माध्यम से मजा किया पर उन्हें रसीद नहीं मिली। पड़ताल में पता चला कि रुपये उनके खाते में भी नहीं जमा हुए। विरोध किया तो रवींद्र टाल मटोल करता रहा। इसके बाद तहरीर देकर थाने में मंगलवार को मुकदमा दर्ज कराया।

Edited By: Vikas Mishra