लखनऊ (जागरण संवाददाता)। खुद को भारतीय रेल निगम लिमिटेड का अधिकारी बताकर दो जालसाजों ने नोएडा के ठेकेदार धर्म प्रकाश सोलंकी से 2.70 लाख रुपये ठग लिए। जालसाजों ने ठेकेदार को रेल निगम में मिंट्टी डालने का ठेका देने के नाम पर रुपये हड़पे। ठेकेदार की तहरीर पर हजरतगंज पुलिस जालसाजों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच कर रही है।

ग्रेटर नोएडा पी-टू ओमेगा आइएएस अफसर सोसाइटी निवासी धर्म प्रकाश सोलंकी ठेकेदार हैं। धर्म प्रकाश के मुताबिक तीन दिन से वह लखनऊ गोमतीनगर में चाचा के घर पर थे। नौ मार्च की दोपहर 1:30 बजे उनके पास एक नंबर से फोन आया। उसने खुद को भारतीय रेल निगम लिमिटेड का अधिकारी अभिषेक रंजन बताया। अभिषेक ने मुंबई के लिए निर्माणाधीन रेलवे लाइन पर मिंट्टी डालने का ठेका दिलाने के लिए कहा। इसके बाद अभिषेक रंजन का नाम बताते हुए अमिताभ रंजन ने फोन किया उन्होंने भी खुद को रेलवे का अधिकारी बताया। अभिषेक ने फोन पर कहा कि आपकी कंपनी रेलवे में ठेके का काम कर सकती है। अभिषेक ने 10 दिन बैक डेट में 2.70 लाख का डीडी मांगा। बैक डेट में डीडी देने से इंकार किया तो कैश मे रुपये मांगे और कहा कि उनका कैंप कार्यालय गोमतीनगर लखनऊ स्थित पिकप भवन में बी एन में है। धर्म प्रकाश ने बताया कि उन्होंने रुपयों की व्यवस्था कर अभिषेक को शाम को फोन किया तो उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री समेत कई अन्य मंत्री लखनऊ आ रहे हैं। वह चारबाग रेलवे स्टेशन पर उन्हें रिसीव करने के लिए पहुंचे हैं। इस कारण मुलाकात नहीं हो सकेगी। अभिषेक ने बनारस निवासी अभय कुमार पांडेय के बैंक खाते में रुपये डालने के लिए कहा। अभिषेक ने गोमतीनगर ए-45 आइएएस कॉलोनी अपना पता मैसेज किया और रात को घर पर आकर मिलने के लिए कहा। इसके बाद अभय के खाते में 2.70 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। धर्मप्रकाश ने बताया कि इसके बाद उन्होंने सैकड़ों बार फोन किया, लेकिन अभिषेक रंजन का मोबाइल स्विच ऑफ रहा। इसके बाद हजरतगंज कोतवाली पहुंचकर मामले की तहरीर दी। इंस्पेक्टर हजरतगंज आनंद कुमार शाही ने बताया कि धर्मप्रकाश सोलंकी की फर्म भाजपा के एक विधायक के नाम से रजिस्टर्ड है। धर्मप्रकाश की तहरीर पर अभिषेक रंजन, अमिताभ रंजन और अभय कुमार पांडेय के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।

ट्रू कॉलर में सेकेट्री रेलवे बोर्ड के नाम से रजिस्टर्ड है नंबर

धर्मप्रकाश सोलंकी ने बताया कि अभिषेक ने उनसे जितनी बाते पूछी वह कोई भी रेलवे निगम का अधिकारी ठेका दिलाने के समय पूछता है। इसके अलावा जब उसने अभिषेक के मोबाइल नबंर को ट्रू कॉलर पर सर्च किया तो वह रेलवे के सेक्रेट्री के नाम से शो कर रहा था। इस कारण उसे विश्वास हो गया था।

By Jagran