हरदोई, जेएनएन। कोरोना काल ने जिंदगी में संघर्ष करना सिखा दिया। परिवार के पालन-पोषण और रोजगार के लिए चालू वित्तीय वर्ष में मनरेगा में 236 दिव्यांगों ने डलिया और फावड़ा उठाया। दिव्यांगों ने 8 हजार 471 मानव दिवस काम किया है।कोविड-19 से बचाव की गाइडलाइन के पालन के साथ जॉबकार्ड धारक दिव्यांगों ने भी रोजगार के लिए काम किया।

मनरेगा में वैसे तो 1429 दिव्यांगों को जॉबकार्ड जारी हुए हैं। 236 ने काम किया है। दिव्यांगों द्वारा गांवों में मनरेगा की कार्ययोजना पर सृजित किए गए मानव दिवसों की संख्या से देखा जाए तो विकास खंड भरखनी में 34 दिव्यांगों ने 1843 दिन, बेहंदर में 28 दिव्यांगों ने 1408 दिन, सांडी में 42 दिव्यांगों ने 1158 दिन, कोथावां में 12 दिव्यांगों ने 616 दिन, सुरसा में 21 दिव्यांगों ने 562 दिन, भरावन में 19 दिव्यांगों ने 505 दिन, हरियावां में आठ दिव्यांगों ने 412 दिन, पिहानी में 12 दिव्यांगों ने 386 दिन, शाहाबाद में नौ दिव्यांगों ने 366 दिन, बावन में 11 दिव्यांगां ने 324 दिन, बिलग्राम में आठ दिव्यांगों ने 278 दिन, संडीला में छह दिव्यांगों ने 149 दिन, अहिरोरी में छह दिव्यांगों ने 103 दिन, कछौना में सात दिव्यांगों ने 103 दिन, टड़ियावां में चार दिव्यांगों ने 91 दिन, हरपालपुर में चार दिव्यांगों ने 72 दिन, माधौगंज में एक दिव्यांग ने 21 दिन और मल्लावां में एक दिव्यांग ने छह दिन काम किया है। श्रम रोजगार उपायुक्त पीएस चंद्रौल का कहना है कि कार्यस्थल पर शारीरिक दूरी और कोविड-19 से बचाव की अन्य गाइडलाइन का पालन कराया जा रहा है। हालांकि दिव्यांगों को काम देने की प्राथमिकता नहीं है, लेकिन उनकी ओर से मांग किए जाने पर अधिनियम के तहत रोजगार दिए जाने का प्रावधान है।

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