लखनऊ, जेएनएन। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड के कर्मचारियों के साथ ही इंजीनियर्स ने भी इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2021 के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश के बिजली कर्मचारी तथा इंजीनियर्स इस बिल के विरोध में आज शाम को सभाएं करेंगे। इनका साफ कहना है कि जब तक यह बिली वापस नहीं लिया जाएगा, इनका विरोध जारी रहेगा।

बिजली कर्मचारियों व अभियंताओं की राष्ट्रीय समन्वय समिति नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इम्पलाइज एंड इंजीनियर्स (एनसीसीओईई) के आह्वान पर प्रदेश के बिजली कर्मचारी और इंजीनियर्स ने सोमवार को शाम चार से छह बजे तक विरोध सभाएं करने की घोषणा की है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले प्रदेश भर के बिजली कर्मियों ने एलान किया है कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2021 जब तक वापस न लिया जाएगा, इनका आंदोलन जारी रहेगा। राजधानी लखनऊ में इनकी विरोध सभा शक्ति भवन में होगी।

संघर्ष समिति के प्रमुख पदाधिकारियों प्रभात सिंह, जीवी पटेल, जयप्रकाश, गिरीश पांडे, सदरुद्दीन राना, राजेंद्र प्रसाद घिल्डियाल आदि ने बताया कि केंद्र सरकार ने मानसून सत्र में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2011 संसद में रखने और पारित करने का एलान किया है। इसी कारण संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को देशव्यापी प्रदर्शनों के क्रम में उत्तर प्रदेश में भी राजधानी लखनऊ में शक्ति भवन सहित समस्त परियोजना मुख्यालय व जिलों में सोमवार शाम चार बजे से विरोध सभाएं होंगी। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि बिजली कानून में व्यापक बदलाव वाले इस बिल को जल्दबाजी में पारित करने के बजाय इसे संसद की बिजली मामलों की स्टैंडिंग कमेटी को भेजा जाना चाहिए। कमेटी के सामने बिजली उपभोक्ताओं और बिजली कर्मियों को विचार रखने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए।

वितरण व्यवस्था निजी हाथों में सौंपे जाने का विरोध

इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2021 के माध्यम से बिजली की वितरण व्यवस्था निजी हाथों में सौंपे जाने को लेकर विरोध शुरू हो गया है। बिजली कर्मचारियों का दावा है कि ये बिल पूरी तरह से निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने और गरीब और सामान्य बिजली उपभोक्ताओं पर कुठाराघात होगा। केंद्र सरकार ने संसद के मानसून सत्र में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2021 संसद में रखने और पारित करने का एलान किया है। इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 में उत्पादन का लाइसेंस समाप्त कर बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन का निजीकरण किया गया। परिणाम ये निकला कि निजी घरानों की महंगी बिजली की मार आम लोगों को झेलना पड़ रहा है। अब इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2021 के जरिए बिजली वितरण का लाइसेंस लेने की शर्त समाप्त की जा रही है। बिजली वितरण का का काम निजी हाथों में सौंप दी जाएगी। इस बिल में प्रावधान है कि किसी भी क्षेत्र में एक से अधिक बिजली कम्पनियां बिना लाइसेंस लिए कार्य कर सकेंगी और बिजली वितरण के लिए निजी कंपनियां सरकारी वितरण कंपनी का इंफ्रास्ट्रक्चर और नेटवर्क इस्तेमाल करेंगी। निजी कम्पनियां केवल मुनाफे वाले औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को ही बिजली देंगी। इससे सरकारी बिजली कंपनी की वित्तीय हालत और खराब हो जाएगी।

Edited By: Dharmendra Pandey