लखनऊ, जेएनएन। माफिया डॉन तथा पूर्व सांसद अतीक अहमद के बेटे को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। लखनऊ के व्यापारी का अपहरण तथा प्रताडऩा के मामले में सीबीआइ की गिरफत से फरार दो लाख के ईनामी मोहम्मद उमर की अग्रिम जमानत याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को खारिज कर दिया है।

प्रयागराज के बाहुबली अतीक अहमद के बेटे मोहम्मद उमर को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। उमर ने सीबीआइ की गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी। इससे पहले उसने इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी, जहां से खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट की शरण में गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जुलाई 2019 में गैर जमानती वारंट जारी हुआ था। जांच एजेंसी ने अब तक आपको नहीं पकड़ा। आप अग्रिम जमानत मांग रहे हैं। आपको राहत नहीं दी जा सकती। 23 अप्रैल 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने अतीक अहमद के गुर्गों की तरफ से एक व्यापारी को अगवा कर जेल में लाए जाने के मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। कोर्ट ने लापरवाही बरतने वाले जेल अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने अतीक अहमद को गुजरात की जेल में ट्रांसफर करने का आदेश दिया था। अतीक अहमद पर आरोप है कि व्यापारी मोहित जायसवाल को 26 दिसम्बर 2018 को गाड़ी समेत घर से अगवा करने के बाद बैरक में पीटा गया था। उसकी कनपटी पर पिस्तौल सटाकर उनकी पांच कंपनियों का मालिकाना हक दो युवकों के नाम ट्रांसफर करवा लिया गया था। 

लखनऊ के व्यापारी के अपहरण के बाद उसके साथ देवरिया जेल में मारपीट के मामले में माफिया और पूर्व सांसद अतीक अहमद के बेटे मोहम्मद उमर के खिलाफ पुलिस ने गैंगस्टर सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है। पुलिस उसकी काफी लंबे समय से तलाश कर रही है। उसकी गिरफ्तारी के लिए प्रदेश के कई शहरों में छापेमारी और दबिश भी दी जा चुकी है लेकिन वह पुलिस के हाथ नहीं लगा। इसी दौरान केस सीबीआइ के पास चला गया। सीबीआइ ने उमर पर एक लाख का इनाम रखा है।

उमर पर सीबीआई ने दो लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है। कुछ माह पहले उसकी फोटो सीबीआई ने उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर में लगवा दी थी। अतीक अहमद प्रदेश की देवरिया जेल में 2018 में बंद था। उस दौरान अतीक के गुर्गों ने लखनऊ के रीयल एस्टेट कारोबारी मोहित जायसवाल का अपहरण कर लिया था।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एनवी रमना, सूर्य कांत और अनिरुद्ध बोस की बेंच ने कहा कि हम याचिका खारिज कर रहे हैं। उमर की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील पी एस पटवालिया ने अग्रिम जमानत की गुहार की, लेकिन सभी जज ने मना करते हुए से कहा कि कई लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं कर पाती। आपको जुलाई 2019 में समन जारी हुआ था। अब जब कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी कर दिया है, तब आप अग्रिम जमानत मांग रहे हैं। इस मामले में आपको कोई राहत नहीं दी जा सकती है। हम याचिका खारिज कर रहे हैं।

आरोप है 26 दिसंबर 2018 को मोहम्मद उमर ने 25-30 गुंडों के साथ लखनऊ के प्रॉपर्टी कारोबारी मोहित जायसवाल को अगवा कर लिया था। वह उसे देवरिया जेल में बंद अपने पिता अतीक अहमद के पास ले गया. वहां जेल के बैरक में मोहित जयसवाल की पिटाई की गई। इस दौरान 45 करोड़ रुपए की जमीन के कागज पर जबरन दस्तखत करवा लिए गए। इसके बाद मोहित की एसयूवी गाड़ी भी वहीं रखवा ली गई।

पुलिस ने मामले की जांच की और अतीक के कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया। कुछ दिनों बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। इस घटना की जानकारी मिलने पर सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने इस केस की सीबीआइ से जांच कराने का आदेश देने के साथ 23 अप्रैल 2019 को कोर्ट ने अतीक अहमद को गुजरात की हाई सिक्योरिटी जेल में भेजने का आदेश दे दिया। तब से अतीक अहमद को अहमदाबाद जेल में रखा गया है।

जून 2019 में सीबीआई ने मामले में एफआईआर दर्ज की। 23 जुलाई 2019 को लखनऊ की विशेष कोर्ट ने मोहम्मद उमर को पेश होने के लिए समन जारी किया। मोहम्मद उमर के अब तक पेश न होने पर इस 12 फरवरी को उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया। 

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