लखनऊ, जेएनएन। High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने मेसर्स डीसीएम लिमिटेड की यूनिट मेसर्स दारूला शुगर वर्कर्स डिस्टिलरी डिवीजन के खिलाफ मेरठ की काली नदी की धारा में अपशिष्ट बहाकर प्रदूषण करने को लेकर दाखिल मुकदमा खारिज करने से इन्कार कर दिया है। यह मुकदमा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दर्ज कराया है। कोर्ट ने लखनऊ की विशेष अदालत प्रदूषण नियंत्रण को इस केस को डेढ़ साल में निपटाने का आदेश भी दिया है।

यह आदेश जस्टिस चंद्रधारी सिंह की एकल पीठ ने याची दारूला सुगर वक्र्स की याचिका पर पारित किया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 1989 में याची के खिलाफ मेरठ की अदालत में परिवाद दर्ज कराया था। बाद में केस को लखनऊ की विशेष अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया था।

कोर्ट में प्रकिया आगे बढ़ी तो याची ने विशेष अदालत में डिस्चार्ज की अर्जी डाल दी। यह अर्जी 11 नवंबर 2019 को खारिज हुई तो याची ने उसके खिलाफ रिवीजन दाखिल किया। यह भी 17 जुलाई 2020 केा खारिज होने के बाद याची ने हाईकोर्ट की शरण ली।

याची की ओर से तर्क दिया गया कि वाद दायर करने में प्रकिया का पालन नही किया गया और  न ही याची के खिलाफ रिकार्ड पर कोई सबूत हैं अत : मुकदमा चलाने का कोई औचित्य नहीं है। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि रिकार्ड पर मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं।

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