लखनऊ, जेएनएन। नियमों को दरकिनार कर अनुसूचित जाति दशमोत्तर छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति के करीब आठ करोड़ रुपये हड़पने के मामले में विशेष अनुसंधान दल (एसआइटी) ने समाज कल्याण विभाग के तत्कालीन निदेशक मिश्री लाल पासवान समेत अन्य के खिलाफ एफआइआर दर्ज की है। सपा शासनकाल में हुए इस घपले की जांच के निर्देश दिसंबर 2016 में दिए गए थे। एसआइटी की जांच में करोड़ों का गबन सामने आया, जिस पर शासन ने एफआइआर दर्ज कर विवेचना का आदेश दिया था।

एसआइटी ने अपनी एफआइआर में तत्कालीन समाज कल्याण निदेशक के अलावा तत्कालीन पटल सहायक शिक्षा अनुभाग धर्मेंद्र सिंह, अधीक्षक शिक्षा अनुभाग डीके गुप्ता व अनिल उपाध्याय, योजना अधिकारी डॉ. मंजूश्री श्रीवास्तव व गुरुनानक एजूकेशन ट्रस्ट के ट्रस्टी सरदार गुरुसिमरन सिंह चड्ढा व अन्य को आरोपित बनाया है। बताया गया कि रुड़की (उत्तराखंड) स्थित गुरुनानक एजूकेशन ट्रस्ट में वर्ष 2011-12 व वर्ष 2012-13 के मध्य निर्धारित दर से अधिक दर पर शुल्क का अनियमित रूप से भुगतान किए जाने की शिकायत की गई थी।

एसआइटी की जांच में सामने आया कि गुरुनानक एजूकेशन ट्रस्ट की स्थापना 10 अक्टूबर 2007 को हुई थी, जिसमें दिल्ली निवासी इंद्रजीत सिंह चड्ढा व गुरुसिमरन सिंह समेत चार ट्रस्टी थे। ट्रस्ट की संशोधित डीड मार्च 2013 को हुई थी। संस्था में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट (पीजीडीएम) व अन्य पाठ्यक्रमों का संचालन होना बताया गया था। संस्था में संचालित पीजीडीएम पाठ्यक्रम की सीटों को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआइसीटीई) से ट्रस्ट के मिलते-जुलते नाम गुरुनानक एजूकेशन ट्रस्ट्स ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन तथा गुरुनानक एजूकेशन ट्रस्ट से अनुमोदन हासिल करने के बाद उत्तराखंड के राज्यपाल/कुलाधिपति के सचिव से ट्रस्ट के मिलते-जुलते नाम रुड़की के पतों पर मान्यता ले ली गई।

संस्था में पढ़ रहे अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए अनुसूचित जाति दशमोत्तर छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि वर्ष 2010-11 व वर्ष 2011-12 में लखनऊ स्थित समाज कल्याण निदेशालय से ली गई। जांच में सामने आया कि उत्तराखंड के राज्यपाल/कुलाधिपति के सचिव के जिस पत्र में शैक्षणिक वर्ष 2010-11, वर्ष 2012-13 के लिए अस्थायी संबद्धता की स्वीकृति व पीजीडीएम पाठ्यक्रम की 180 सीटों का उल्लेख किया गया, उसमें संस्था का नाम हरमिश कॉलेज ऑफ इंजीनियङ्क्षरग एंड मैनेजमेंट, रुड़की का नाम अंकित किया गया।

उत्तर प्रदेश के मूल निवासी छात्र-छात्राओं को दी जाने वाली छात्रवृत्ति के नाम पर खेल किया गया। बताया गया कि छात्रवृत्ति के निर्धारित 91,600 रुपये के स्थान पर दो लाख रुपये से अधिक के भुगतान किए गए। फर्जी दस्तावेजों के जरिये करीब आठ करोड़ रुपये हड़प लिए गए। माना जा रहा है कि अन्य जिलों में भी जांच कराये जाने पर छात्रवृत्ति की राशि में करोड़ों का घपला सामने आ सकता है।  

Posted By: Umesh Tiwari

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