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लखनऊ [राजीव बाजपेयी]। एक निजी कंपनी में कार्यरत विकास श्रीवास्तव ने बख्शी का तालाब क्षेत्र में एक सोसाइटी संचालक को प्लॉट खरीदने के लिए पैसे दिए थे। तीन साल बाद भी सोसाइटी संचालक उनको चक्कर लगवा रहा है। गोमतीनगर नगर विस्तार में कारोबारी अनिल कुमार ने एक सोसाइटी में प्लॉट बुक कराया था। पांच साल बाद भी संचालक यह बताने को तैयार नहीं है कि प्लॉट है कहां पर। 

मकान और प्लॉट का सपना दिखाकर आम आदमी की जीवनभर की गाढ़ी कमाई लूटने वाली इस तरह की आवासीय समितियों पर अब प्रशासन अपना शिकंजा कसेगा। डीएम कौशलराज शर्मा के निर्देश के बाद अब करीब 35 आवासीय समितियों की सूची तैयार की गई है, जिनकी जांच की जाएगी। 

सपने दिखाकर हड़प लिए पैसे

शहरी क्षेत्रों से जुड़े ग्रामीण इलाकों में जमीन महंगी होने के बाद से तमाम आवासीय समितियां सक्रिय हो गई थीं। आवासीय समितियों ने लोगों को घरों और प्लॉट का झांसा देकर उन जमीनों पर घर बसाने का सपना दिखाया, जिनका सौदा ही उन्होंने किसान से नहीं किया था। अब आवंटी प्लॉट के लिए दौड़ रहे हैं और सोसाइटी संचालक यहां-वहां प्लॉट देने का वादा कर पल्ला झाड़ रहे हैं। हजारों लोग सोसाइटी के इस खेल में अपनी जीवनभर की गाढ़ी कमाई इसी तरह लुटाकर बैठे हैं।  

एसडीएम से मांगी रिपोर्ट

डीएम ने सभी एसडीएम से उनके इलाके में सक्रिय समितियों की पूरी रिपोर्ट तलब की है। डीएम ने पूछा है कि समितियों के दस्तावेज वैध हैं या नहीं। वह रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटीज से पंजीकृत हैं या नहीं। समितियों के पास कितनी जमीन है? जमीन का भू उपयोग क्या है? एससी-एसटी की कितनी जमीन बेची? उसकी अनुमति प्रशासन से ली या नहीं।

दर्ज हो सकती है रिपोर्ट

जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा का कहना है कि सोसाइटी में किसी तरह की गड़बड़ी मिलने पर संचालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर गैंगेस्टर की कार्रवाई होगी।

 

Posted By: Divyansh Rastogi

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