लखनऊ (जासं)। स्कूलों में पढ़ाई के साथ खेलकूद की गतिविधियों पर भी फोकस किया जाना चाहिए। विद्यार्थी खेल के माध्यम से टीम भावना में काम करना सीखेंगे। यह विचार काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सार्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआइएससीई) के चीफ एग्जीक्यूटिव एवं सेक्रेट्री गैरी अराथून ने व्यक्त किए। वह शुक्रवार को सिटी मांटेसरी स्कूल (सीएमएस) की कानपुर रोड शाखा के आडिटोरियम में सीआइएससीई के स्कूलों के प्राचार्यो की बैठक में उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्कूलों को खेल से संबंधित गतिविधियों को भरपूर बढ़ावा देना चाहिए। इससे विद्यार्थियों में एकता और अनुशासन की भावना का विकास होता है। विद्यार्थी चुनौतियों से जूझना सीखते हैं।

काउंसिल नेशनल स्पो‌र्ट्स एंड गेम्स विषय पर आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन में गैरी अराथून ने कहा कि शारीरिक विकास भी बहुत जरूरी है। विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास होगा तभी वह बेहतर ढंग से कॅरियर को बना सकेंगे। ऐसे में पढ़ाई के साथ खेलकूद की गतिविधियों पर भी पर्याप्त जोर दें। एसोसिएशन ऑफ स्कूल फॉर द इंडियन स्कूल सार्टिफिकेट के सेक्रेट्री सुधीर जोशी ने कहा कि खेल व पढ़ाई में सामंजस्य स्थापित करते हुए इस प्रक्रिया से अभिभावकों को भी जोड़ा जाए। खेलकूद से न सिर्फ शारीरिक विकास होता है बल्कि जूझने की क्षमता भी बढ़ती है। सीएमएस के संस्थापक जगदीश गांधी ने कहा कि बौद्धिक विकास के लिए खेलकूद बहुत जरूरी है। खेल के मैदान में गुण पैदा होते हैं

और चरित्र का निर्माण भी होता है। कार्यक्रम में उपस्थित प्राचार्यो का स्वागत सीएमएस कानपुर रोड शाखा की प्राचार्य विनीता कामरान ने किया। उन्होंने कहा कि हमें विद्यार्थियों को गुड व स्मार्ट बनाने पर जोर देना चाहिए। ऐसा करने के लिए खेलकूद बहुत जरूरी है।

Posted By: Jagran