लखनऊ (जेएनएन)। डॉक्टर बनने का सपना देख रहे प्रदेश के होनहारों को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यहां के चार राजकीय मेडिकल कॉलेजों से छीनी गईं एमबीबीएस की 400 सीटें वापस लौटा दी हैं। बांदा, सहारनपुर, जालौन व आजमगढ़ के इन राजकीय मेडिकल कॉलेजों की 400 सीटों पर भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआइ) ने मेडिकल पढ़ाई की अनुमति देने से मना कर दिया था। अब यह सीटों वापस मिलने के साथ ही प्रदेश में राजकीय एमबीबीएस सीटों की संख्या फिर 1990 हो गई है।

चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक डॉ.केके गुप्ता ने गुरुवार को बताया कि राजकीय मेडिकल कॉलेजों में सुधार के लिए प्रदेश सरकार के ईमानदार प्रयासों और मेडिकल विद्यार्थियों के हित को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह मौका दिया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव या चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव से यह अंडरटेकिंग देने को कहा है कि तय समय में वह इन मेडिकल कॉलेजों में मानकों के मुताबिक सभी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराएंगे। चूंकि नीट यूजी काउंसिलिंग 19 जून से शुरू हो रही है, इसलिए प्रदेश सरकार से 18 जून यानी सोमवार की सुबह अंडरटेकिंग देने को कहा गया है। हालांकि प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में रोकी गईं एमबीबीएस की 1700 सीटों पर कोर्ट ने फिलहाल राहत नहीं दी है।

यह था मामला

एमसीआइ की टीम ने निरीक्षण के दौरान बांदा, सहारनपुर, जालौन व आजमगढ़ के राजकीय मेडिकल कॉलेजों के अलावा एक दर्जन निजी मेडिकल कॉलेजों में भी कई खामियां पाई थीं। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक राजकीय मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की कमी जहां सबसे बड़ी समस्या थी, वहीं नर्सिंग स्टाफ व सीटी स्कैन मशीन जैसे उपकरणों की कमी भी चिकित्सा शिक्षा तंत्र के मानकों के अनुरूप नहीं थी।

बीते अप्रैल में प्रदेश की ओर से एमसीआइ को अंडरटेकिंग देकर चारों राजकीय मेडिकल कॉलेजों की खामियां दूर करने का दावा किया गया था, लेकिन एमसीआइ ने इस अंडरटेकिंग को नहीं माना और कड़ा निर्णय लेते हुए चारों राजकीय मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा शिक्षा की पढ़ाई की अनुमति देने से ही इंकार कर दिया था।

 

By Ashish Mishra