लखनऊ[जुनैद अहमद]। सभ्यताओं का संगम हो या ऐतिहासिक बेशकीमती मुद्राएं। हर दौर की यादें हों या फिर इतिहास को प्रमाणित करते साक्ष्य। संग्रहालय में स्वर्णिम इतिहास से लेकर वर्तमान तक का सफर करने का मौका मिलता है। अब में मौजूद वर्षो पुरानी मूर्तियों और कलाकृतियों को लोग मोबाइल एप से देख सकते हैं। इसे और हाईटेक किया जा रहा है। वहीं कई संग्रहालयों का जीर्णोद्धार हो रहा है। डिजिटल इंडिया की राह पर भी चल पड़ा है। पर्यटकों के संग्रहालय में प्रवेश करते ही मोबाइल के डिस्प्ले पर वहा रखी प्राचीन धरोहरों की जानकारी मिल रही है। नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान में स्थिति ने एक खास किस्म का मोबाइल एप 'स्टेट म्यूजियम लखनऊ' तैयार करवाया है। यूपीडेस्को द्वारा बनाए गए इस मोबाइल एप की खासियत यह है कि यह ऑफलाइन मोड में भी यह काम करता है। के निदेशक आनंद कुमार सिंह ने बताया कि संग्रहालय में मोबाइल एप के माध्यम से पर्यटक प्राचीन धरोहरों से रूबरू हो रहे हैं।

चिड़ियाघर का लोक कला संग्रहालय 2.45 करोड़ से होगा हाईटेक

राज्य संग्रहालय को हाईटेक बनाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। इसके लिए शासन ने प्रस्तावित 2.45 करोड़ बजट की पहली किस्त जारी भी कर दी है। पहली किस्त में मिले 1.36 करोड़ से संग्रहालय की सुरक्षा व्यवस्था, ऑनलाइन टिकट व एक अस्थाई कला गैलरी सहित कई बदलाव किए जाएंगे। इसमें संग्रहालय के दोनों छोर पर भव्य गेट के साथ सुरक्षा के लिए मेटल डिटेक्टर, आधुनिक लगेज काउंटर बनेगा। संग्रहालय के प्रवेश द्वार पर रिसेप्शन कम सोवनियर शॉप खुलेगी। इसके अलावा पुरानी व्यवस्था के तहत दिए जाने वाले टिकट की जगह अब कम्प्यूटराइज टिकट मिलेंगे। एक अस्थाई गैलरी का भी निर्माण कराया जाएगा जो कला प्रदर्शनियों के लिए किराए पर दी जाएगी। 30 दिवसीय प्रदर्शनी का होगा आगाज

विश्व संग्रहालय दिवस पर में ग्यारह दिवसीय जैन कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगेगी। शुक्रवार को दोपहर 1 बजे प्रदर्शनी का उद्घाटन होगा। उसके बाद सुबह 10:30 से शाम 4:30 बजे के बीच पर्यटक संग्रहालय आकर प्रदर्शनी का दीदार कर सकेंगे। 1यहा अब भी जारी है काम 1जू स्थित लोक कला संग्रहालय का काम वर्ष 2013 से चल रहा है लेकिन अभी तक उसका काम पूरा नहीं किया जा सका है। पूरे प्रोजेक्ट को जनवरी 2016 तक पूरा करना था लेकिन काम अभी जारी है। तीन करोड़ 37 लाख रुपये के बजट से तैयार होने वाले लोक कला संग्रहालय में बन रही गैलरी में अवध, ब्रज, भोजपुरी, बुंदेलखंड, रुहेलखंड की संस्कृति को देखने का अवसर मिलेगा। गैलरी में संबंधित शहर की लोक कलाओं का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अलावा गीत-नृत्य का भी विवरण किया जाएगा। पहले स्वतंत्रता संग्राम का गवाह

रेजीडेंसी के खंडहर आज भी हमें आजादी की पहली क्त्राति 1857 की याद दिलाते हैं। यहा स्थिति एएसआइ का संग्रहालय आज भी देश की आजादी के लिए दी गई कुर्बानियों की याद दिला रहा है। रेजीडेंसी में बने 1857 स्मारक संग्रहालय में विद्रोह से जुड़ी तस्वीरें, पुरानी फोटो, शिलालेख, दस्तावेज, बंदूकें, तलवारें, तोपें, तमगे व संग्राम से जुड़ी नायाब वस्तुएं सरंक्षित हैं। यहा पर दिखता है महात्मा गाधी का जीवन

गाधी भवन में बने गाधी संग्रहालय में महात्मा गाधी के जीवन के कई अनछुए पलों का अहसास होता है। 1973 में बने इस संग्रहालय में घुसते ही मुंबई में हुए अधिवेशन का दृश्य दिखाई देता है जिसमें महात्मा गाधी, सरदार वल्लभ भाई पटेल और जवाहर लाल नेहरू बैठे हुए हैं। इसके अलावा गाधी जी से संबंधित कई पत्र व चित्रकला व मूर्तिया मौजूद हैं। कमाल की है कथक की विरासत

राजधानी की गुइन रोड स्थित कालका-बिंदादीन की ड्योढ़ी अब कथक संग्रहालय के रूप में विख्यात है। पिछले दो लगभग दो वर्ष पहले इस ड्योढ़ी को संरक्षित करके कथक संग्रहालय दर्शकों के चालू कर दिया। इस संग्रहालय में घुसते ही एक कुंआ व दीवार पर ड्योढ़ी का इतिहास दिखाए देगा। एक कमरे में कालका-बिंदादीन ड्योढ़ी के पूरे वंशजों की लिस्ट लगी है। वहीं दूसरी ओर कथक गुरु बिरजू के चित्रों का संग्रह है। एक अन्य कमरे में घुंघरू, हारमोनियम, तबला आदि मौजूद हैं।

यहा चल रहा जीर्णोद्धार

सौ साल से भी ज्यादा पुराने ऐतिहासिक कला एवं शिल्प महाविद्यालय के म्यूजियम में कलाकृति व चित्रकलाओं का जखीरा है। पिछले चार साल से बंद पड़े कला एवं शिल्प महाविद्यालय के शिल्प संग्रहालय का जीर्णोद्धार शुरू हो गया है। महाविद्यालय के प्रिंसिपल रतन कुमार ने बताया कि कालेज की स्थापना 1911 में हुई थी, उसके कुछ समय बाद ही यह कला छात्रों को देश दुनिया के शिल्प वर्क से रूबरू कराने के उद्देश्य से संग्रहालय की स्थापना तत्कालीन प्रिंसिपल सुधीर रंजन खस्तगीर ने की थी। वह आधुनिक कला के महान चित्रकार और मूर्तिकार भी थे। म्यूजियम में देश के चर्चित आधुनिक कलाकारों की 660 अनूठी कलाकृतिया मौजूद हैं।

By Jagran