लखनऊ[दुर्गा शर्मा]। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग उप्र के अंतर्गत स्वास्थ्य प्रणाली सुदृढ़ीकरण परियोजना के तहत जागरूकता का डिजिटल तरीका अपनाया जा रहा है। इसके पीछे मीडिया विंग के रूप में युवाओं की टीम काम कर रही है। आम लोग ही नहीं अस्पताल स्टाफ को जागरूक करने के लिए भी टीम काम कर रही है। जागरूकता का यह तरीका लोगों को पसंद आ रहा है। यू ट्यूब पर अपलोड अवेयरनेस वीडियो को लोग लाइक और शेयर कर रहे हैं। छह से सात मिनट की लघु फिल्म के पीछे पूरी टीम की बड़ी मेहनत छिपी है। दैनिक जागरण आपको इससे रूबरू करा रहा है। शूटिंग और एक्टिंग भी डेंगू पर आधारित शार्ट फिल्म में मीडिया विंग के सदस्यों ने ही अभिनय भी किया था। इसे तैयार करने में चार दिन लगे। लखनऊ के अलग-अलग हिस्सों में शूटिंग की गई है। स्लम एरिया में लोगों के बीच जाकर घटों पसीना बहाया है। हैंड हाईजीन पर भी किया काम

अभी हाल ही में हैंड हाईजीन डे मनाया गया। इस मौके पर भी अस्पताल स्टाफ को जागरूक करने के लिए शार्ट फिल्म तैयार की गई थी। इसमें अस्पताल स्टाफ को ही शूट किया गया था। ट्रेनिंग वर्कशॉप में इनका प्रयोग किया जाता है। इन प्रोजेक्ट पर होगा काम

हैंड हाईजीन और डेंगू के बाद अब रक्तदान जागरूकता, डॉक्टर्स डे और चाइल्ड प्रोटेक्शन पर काम किया जाना है। बड़ी जुगौली में शूटिंग के दौरान स्थानीय लोगों के साथ टीम के कुछ सदस्य मीडिया विंग के सदस्य

- डॉ. धीरज तिवारी, असिस्टेंट डायरेक्टर, इंफॉर्मेशन, एजुकेशन और कम्युनिकेशन (आइईसी) सेल।

- कात्या बाजपेई (इंफॉर्मेशन, एजुकेशन और कम्युनिकेशन एक्सपर्ट)

- अखिलेश मित्र (मल्टीमीडिया (प्रोड्यूसर)

- शुभा श्रीवास्तव (कंसल्टेंट कम्युनिकेशन एंड ग्रीवास)

- स्वप्निल सिंह (मीडिया एंड पब्लिक रिलेशन ऑफिसर) यहा-यहा हुई शूटिंग

शहर में इन शॉर्टफिल्मों की शूटिंग के लिए स्लम क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई। इनमें अधिकतर शूटिंग बड़ी व छोटी जुगौली के आसपास की गई।काम जनजागृति का ही था, लेकिन तकनीक ने अब इसे जहा और अधिक ग्राह्य बना दिया है वहीं, इसकी प्रसार की सीमा भी बढ़ गई है। शॉर्ट फिल्मों के माध्यम से जागरूकता फैलाने के काम में यूटय़ूब और सोशल मीडिया प्रमुख औजार बनकर सामने आए हैं।

क्या कहते हैं परियोजना निदेशक?

उप्र स्वास्थ्य प्रणाली सुदृढ़ीकरण प्रोजेक्ट के अपर परियोजना निदेशक हर्ष शर्मा का कहना है कि वर्ष 2012 से यह परियोजना काम कर रही है। हम स्वास्थ्य निदेशालय के सहायक के रूप में काम करते हैं। बीते वर्ष ही मीडिया सेल बना। तब से अवेयरनेस का डिजिटल तरीका अपनाया जा रहा है। शॉर्ट फिल्म तैयार होने के बाद अनुमति ली जाती है। उसके बाद उसे रिलीज कर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं।

By Jagran