अंशू दीक्षित, लखनऊ : राजधानी में पांच हजार बकाये वाले उपभोक्ता की बिजली काटने में रियायत नहीं की जाती, वहीं सरकारी गेस्ट हाउस लेसा के करोड़ों के कर्जदार हैं। फिर भी बिजली जला रहे हैं। यह हाल राजधानी के आधा दर्जन वीआइपी गेस्ट हाउसों का है। जवाहर भवन व इंदिरा भवन पर भी करोड़ों बकाया है। प्रमुख सचिव ऊर्जा द्वारा दिए गए आश्वासन बाद भी भुगतान बीस दिन बाद भी नहीं मिला।

24 मार्च को बिजली महकमे ने सभी गेस्ट हाउस, जवाहर व इंदिरा भवन समेत कई बड़े सरकारी कर्जदारों की बिजली काट दी थी। इससे शासन स्तर पर खलबली मच गई थी। प्रमुख सचिव ऊर्जा आलोक कुमार की दखलंदाजी के बाद बिजली जोड़ी गई थी। पत्र में तत्कालीन मध्यांचल के प्रबंध निदेशक एपी सिंह को आश्वस्त किया गया था कि धनराशि की व्यवस्था किए जाने तथा वर्णित कारणों के दृष्टिगत दस दिनों का समय दिया जाए। यह मियाद पांच अप्रैल को खत्म हो गई। इसको लेकर अभियंताओं ने मौखिक रूप से संबंधित अफसरों से बात की लेकिन मामला नहीं बना।

बाद में 13 अप्रैल को अधिशासी अभियंता राजभवन ने सचिव एवं राज्य संपत्ति अधिकारी को पत्र लिखकर एक बार फिर पंद्रह करोड़ उन्नीस लाख बकाया मांगा। दस दिन हो गए हैं लेकिन राज्य संपत्ति विभाग से कोई जवाब नहीं आया है। बिजली विभाग के अभियंताओं ने बताया कि राज्य संपत्ति विभाग द्वारा बिजली बिल का अलग से कोई प्राविधान नहीं करते, नतीजतन समस्या का समाधान नहीं हो पाता है। बाक्स

कट सकती है वीआइपी की बत्ती

एक बार फिर बिजली महकमा अपना बकाया पैसा निकलवाने के लिए सख्त कदम उठा सकता है। सूत्रों की माने तो इस बार अगर बिजली कटी तो गर्मी में वीआइपी को मच्छर कुछ ज्यादा ही परेशान कर सकते हैं। बाक्स

ये हैं कर्जदार

उपभोक्ता बकाया

इंदिराभवन 86.59,048 लाख

जवाहर भवन 69.69,597 लाख

स्टेट गेस्ट हाउस 11.48,712 लाख

वीआइपी गेस्ट हाउस 90.28,990 लाख

मल्टी स्टोरी ओल्ड1.34,5267 करोड़

मल्टी स्टोरी थर्ड 4.52,20,041 करोड़

मल्टी स्टोर न्यू 1.56,44316 करोड़

वीवीआइपी गेस्ट हाउस 2.40 करोड़

डालीबाग गेस्ट हाउस 2.98 करोड़

पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस 47.61 लाख नोट : अभियंताओं के मुताबिक मार्च में बिजली कटने पर चार करोड़ दस लाख चालीस हजार रुपये जमा किए थे, जो तीन अप्रैल को बिजली विभाग के खाते में आए थे। पंद्रह करोड़ से अधिक का बकाया है। पत्राचार किया जा चुका है। अभी तक भुगतान नहीं हुआ है।

अनिल वर्मा, अधिशासी अभियंता, राजभवन।

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