लखनऊ [शोभित श्रीवास्तव]। पंडित दीन दयाल उपाध्याय आदर्श नगर पंचायत योजना में 14 जिले फिसड्डी साबित हुए हैं। इनमें कानपुर, पीलीभीत, अमेठी, कौशाम्बी, गाजियाबाद, चन्दौली, जौनपुर, श्रावस्ती, बदायूं, शाहजहांपुर, झांसी, कासगंज, बहराइच व औरैया जिले शामिल हैं। वित्तीय वर्ष के आठ महीने बीत चुके हैं, लेकिन यह जिले अपने यहां से एक-एक नगर पंचायत का चयन तक नहीं कर सके। यहां स्थानीय राजनीति नगर पंचायतों के चयन में रोड़ा बन रही है। 

दरअसल, योगी सरकार ने बड़े नगर निकायों की तर्ज पर छोटे नगर निकायों में रहने वाले लोगों को भी मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने के लिए वर्ष 2018 में 'पंडित दीनदयाल उपाध्याय आदर्श नगर पंचायत योजना' लागू की थी। छोटे नगर निकायों की तुलना में बड़े नगर निकायों की न सिर्फ आय अधिक होती है बल्कि सरकार से भी वित्तीय मदद मिल जाती है। वहीं, कम आमदनी वाले और सरकारी मदद न मिलने से छोटे नगर निकायों में विकास कार्य नहीं हो पाते हैं। इसलिए सरकार ने इस योजना की शुरुआत की है। इसमें हर वित्तीय वर्ष में प्रत्येक जिले की एक नगर पंचायत का चयन किया जाता है।

इसमें आबादी के अनुसार दो करोड़ से लेकर चार करोड़ रुपये तक की धनराशि मूलभूत सुविधाएं विकसित करने के लिए दी जाती हैं। वर्तमान वित्तीय वर्ष में अब तक 61 जिलों ने ही इस योजना में प्रस्ताव दिया है। 14 जिलों ने अपने यहां से प्रस्ताव नहीं भेजे हैं। इसके लिए स्थानीय राजनीति को जिम्मेदार माना जा रहा है। सरकार ने पंचायतों के चयन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहमति शब्द जोड़ा है। इसलिए जिन जिलों में जनप्रतिनिधि सहमत नहीं हो पाए हैं वहां के प्रस्ताव लटक गए हैं। बगैर सहमति के डीएम प्रस्ताव नहीं भेज पा रहे हैं।

योजना के तहत यह होने हैं काम

पेयजल, सेप्टेज मैनेजमेंट, सड़क, फुटपाथ, नाली, जल निकासी, सोलर लाइट, एलइडी लाइट, सार्वजनिक शौचालय, तालाब संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण, चौराहों का निर्माण, पार्क एवं खेल के मैदान का निर्माण, सामुदायिक केंद्र, गोशाला का निर्माण, सार्वजनिक परिवहन, शुद्ध पेयजल व सार्वजनिक सुविधाओं का विकास आदि।

अफसरों के खिलाफ की जाएगी कार्रवाई

प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज कुमार सिंह का कहना है कि मुख्य सचिव ने भी पिछले दिनों 14 जिलों से प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए थे, लेकिन यह अभी तक नहीं मिले हैं। यदि स्थानीय स्तर पर प्रस्ताव फाइनल करने में किसी भी प्रकार की दिक्कत आ रही है तो जिलाधिकारी को पहले से तय मापदंड का सहारा लेकर प्रस्ताव भेजना चाहिए। ऐसा न करने वाले अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

 

Posted By: Umesh Tiwari

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