लखनऊ। आइआइटी, बीएचयू के विजिटिंग प्रोफेसर एवं मैग्सेसे अवार्ड के विजेता संदीप पांडेय पर प्रशासन ने आगे सेवाएं देने से रोक लगा दी हैं। यह फैसला पिछले दिनों ही बोर्ड ऑफ गवर्नेंस की बैठक में लिया गया था। संस्थान के निदेशक ने भी अनुबंध को निरस्त करने पर अंतिम मुहर लगा दी है। मालूम हो कि आइआइटी, बीएचयू के कुछ छात्रों ने कुलपति एवं बोर्ड आफ गवर्नेंस के चेयरमैन प्रो.गिरीश चंद्र त्रिपाठी के साथ ही संस्थान के निदेशक प्रो. राजीव संगल से डा. संदीप पांडेय के संबंध में शिकायत की थी। आरोप लगाया था कि डा. पांडेय ने निर्भया दुष्कर्म कांड की प्रतिबंधित डाक्युमेंट्री छात्रों को दिखाया है। साथ ही उनपर कैंपस में धरना-प्रदर्शन जैसी गतिविधियों में लिप्त होने का भी आरोप है।बताया जा रहा है कि डा.पांडेय का अनुबंध छह माह पहले ही जुलाई में खत्म कर दिया गया था। वह पिछले ढाई साल से यहां बतौर विजिटिंग प्रोफेसर पढ़ा रहे थे।

मैं नक्सली नहीं गांधीवादी

संदीप पांडेय ने कहा कि बोर्ड ऑफ गर्वनेंस ने उन्हें विवि से निकालने का फैसला लिया है। इसकी जानकारी मुझे हुई है। मैं जिस विषयों की शिक्षा देता था, वह मुझसे वापस ले लिए गए हैं। इस कार्य में कुलपति जीसी त्रिपाठी, डीन धनंजय पांडेय व एक अन्य व्यक्ति का हाथ है। मुझ पर राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया है। मेरे ऊपर लगे सारे आरोप निराधार हैं, मैं किसी भी नक्सली से नहीं जुड़ा हूं और न ही मैं देशद्रोही हूं। मैं पूरी तरह से गांधीवादी सोच का हूं। देश के प्रति हमेशा समर्पित रहा हूं। साथ ही यह भी आरोप है कि मैंने निर्भया पर बनी डॉक्यूमेंट्री अपनी कक्षा में विद्यार्थियों को दिखाया है, जबकि ऐसा नहीं है। संदीप ने बताया कि मैं वह डॉक्यूमेंट्री विद्यार्थियों को दिखाने वाला था, लेकिन मुझे रोक दिया गया था।

Posted By: Ashish Mishra