लखनऊ। भावी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गंगा से जुड़ी प्राथमिकता को देखते राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण सक्रिय हो गया है। इसकी मेन बाडी 'नेशनल मिशन क्लीन गंगा' की विशेष बैठक 23 मई को पर्यावरण मंत्रालय में होगी। इसमें भावी पीएम की मंशा के अनुरूप नए सिरे से रणनीति तैयार करने पर विचार-विमर्श संभव है।

वाराणसी में सूत्रों के मुताबिक बैठक में खास तौर पर प्राधिकरण के विशेषज्ञ सदस्य पर्यावरणविद् बीएचयू के प्रो.बीडी त्रिपाठी को बुलाया गया है। इसकी वजह नरेंद्र मोदी की संसदीय सीट काशी के होने से जोड़कर देखा जा रहा है। मोदी ने गंगा आरती के दौरान ही गंगा की सेवा को अपनी प्राथमिकता बताई थी। मिशन निदेशक राजीव रंजन मिश्र की अध्यक्षता में बैठक होनी है। प्राधिकरण के चेयरमैन खुद प्रधानमंत्री होते हैं। प्रो.त्रिपाठी ने बताया कि वैसे भी गंगा सेवा की शुरुआत के लिए काशी से बेहतर कोई स्थान नहीं हो सकता। यही वजह थी कि गंगा एक्शन प्लान की शुरुआत भी वर्ष 1986 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने बनारस के राजेंद्र प्रसाद घाट से ही की थी।

बताते चलें कि वर्ष 2009 में राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण की स्थापना हुई थी। इसके बाद 2600 करोड़ रुपये व‌र्ल्ड बैंक से कर्ज लेकर गंगा निर्मलीकरण की दिशा में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रयास शुरू हुए। अभी इससे जुड़ी योजनाएं चल ही रही हैं कि इसी दौर में प्राधिकरण ने भविष्य के लिए 7000 करोड़ रुपये के नए प्रोजेक्ट भी तैयार कर लिए हैं। अब इन नए प्रोजेक्टों को शुरू करने की सहमति नए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संस्तुति पर ही निर्भर करेगी।

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