जागरण ब्यूरो, लखनऊ : आगरा में पिछले दिनों हुई शोध छात्रा की हत्या सहित सूबे में महिलाओं के साथ बढ़ते अपराध की घटनाएं सोमवार को विधानसभा में गूंजी। कार्य स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से सदन में ऐसी घटनाएं उठाए जाने पर संसदीय कार्यमंत्री मुहम्मद आजम खां के रवैये पर बसपा सदस्यों ने आपत्ति उठाते हुए जमकर हंगामा किया। आजम खां व नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य में नोक-झोंक हुई। विरोध में बसपा सदस्यों ने वेल में आकर सरकार विरोधी नारे लगाए जिससे सदन की कार्यवाही 15 मिनट स्थगित भी रही।

शून्य प्रहर में बसपा के डाक्टर धर्मपाल सिंह ने आगरा के दयालबाग एजूकेशनल इंस्टीट्यूट में शोध छात्रा की 15 मार्च को बेरहमी से हुई हत्या का मामला उठाते हुए कहा कि शहर में महिलाओं के साथ बढ़ती आपराधिक घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई है। चाकूओं से गोद कर जिस तरह से हत्या की गई है उससे चारों तरफ खौफ फैल गया है। हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग पर पुलिस ने छात्र-छात्राओं पर लाठी चार्ज किया है। नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने आगरा के साथ ही मुरादाबाद में छेड़खानी की घटना पर छात्रा द्वारा आत्महत्या करने, कानपुर के बजरिया थाने में छात्रा से छेड़खानी के विरोध में उसे मारने-पीटने आदि की घटनाओं को उठाते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं पर तत्काल कानूनी कार्रवाई हो।

एक साथ कई घटनाएं को कार्य स्थगन में उठाए जाने को नियमों के विपरीत बताते हुए संसदीय कार्यमंत्री आजम खां ने मुरादाबाद की घटना के संबंध में कहा कि नेता प्रतिपक्ष की सूचना भ्रामक है। आगरा की घटना पर उन्होंने कहा कि जांच चल रही है। घटना के पीछे कोई करीबी ही माना जा रहा है। आजम ने घटना को दर्दनाक बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों को यहां तक लाने वालों को शर्म होनी चाहिए। इस पर मौर्य ने कहा कि सरकार को घटना को गंभीरता से संज्ञान में लेना था। सरकार घटिया मानसिकता से बाज आए। मौर्य ने कहा कि ऐसे में मामलों में वह कोई राजनीति नहीं करते। सरकार अपराधों पर रोक लगाने को कार्रवाई करे। जवाब में आजम ने किसी पार्टी या व्यक्ति का नाम लिए बगैर कहा कि हम उन्हें शर्म नहीं दिलाना चाहते कि हत्या, बलात्कार, लूट में किनके लोग जेल में हैं? उन्होंने कहा कि सरकार का घटियापन नहीं बल्कि नेता प्रतिपक्ष का घटियापन है जिसकी वह निंदा करते हैं। इस पर मौर्य ने जहां सरकार पर अपराध को छिपाने का आरोप लगाया वहीं बसपा सदस्य सरकार विरोधी नारे लगाते हुए वेल में पहुंच गए। कई बार कहने के बाद भी जब बसपा सदस्य वेल से नहीं हटे तो अध्यक्ष ने सदन को पहले पांच मिनट के लिए और फिर 10 मिनट के लिए स्थगित कर दिया। बाद में कार्यवाही शुरू होने पर अध्यक्ष ने कार्य स्थगन प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए कहा कि उक्त घटनाओं को संसदीय कार्यमंत्री ने गंभीरता से लिया है।

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