ललितपुर ब्यूरो :

सुदूर मदनपुर क्षेत्र से जामनी बाँध तक बहने वाली बदहाल ओडी नदी नव जीवन के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रही है। नदी के 42 जल स्रोतों के प्वाइण्ट से सिल्ट हटायी जा रही है। साथ ही गहरीकरण का काम जोरों पर चल रहा है। सिल्ट हटाते ही जल स्रोतों से पानी की धार फूट पड़ी है, जिससे नदी अब अपने नये स्वरूप में लौट रही है। जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह के भागीरथी प्रयासों से नदी को नया जीवन देने में लघु सिंचाई विभाग व मनरेगा के तहत कार्य जोरों पर चल रहा है।

जनपद के अंतिम छोर पर मदनपुर क्षेत्र में बहने वाली इस नदी का पूर्व में अपना अलग ही महत्व था। मदनपुर से जामनी बाँध तक बहने वाली लगभग 12 किलोमीटर से अधिक लम्बी इस नदी के आसपास मदनपुर, दिदौनिया, हँसेरा आदि गाव व इनके कई मजरे बसे हुए हैं। कुछ वर्षाे पूर्व तक यह नदी अस्तित्व में थी, जिससे आसपास के सैकड़ों हैक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई होती थी। चूंकि नदी के चारों तरफ हरा भरा जंगल है अत: जंगली जानवर भी इसी नदी से अपनी प्यास बुझाते थे। इस नदी के किनारे पर सैंकड़ो की संख्या में हरे भरे पेड़ पौधे और कई तरह की वनस्पतिया थी, जो इस नदी की सुन्दरता में चार चाद लगाती थी। वक्त की मार के चलते कुछ वर्षाे से यह नदी बदहाल होती चली गयी। साल दर साल उपेक्षा और बदहाली के चलते नदी में सिल्ट जमा होने से इसका अस्तित्व खतरे में पड़ गया। इस नदी को नया जीवन देने के लिए जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह ने भागीरथी प्रयास किये और शासन को नदी के जीर्णाेद्धार के लिए प्रस्ताव भेज दिया। शासन से हरी झण्डी मिलते ही लघु सिंचाई विभाग व मनरेगा के संयुक्त प्रयासों से इस नदी के अस्तित्व को बचाने की कवायद शुरू हो गई थी। लगभग 2 माह पूर्व अफसरों ने नदी का भ्रमण कर जीर्णाेद्धार की सम्भावनायें तलाशी थी। साथ ही ग्रामीणों से भी महत्वपूर्ण जानकारिया लेकर खाका तैयार किया था। 'दैनिक जागरण' ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।

मौजूदा समय में मनरेगा के तहत लघु सिंचाई विभाग से इस नदी के गहरीकरण, चौड़ीकरण का काम जोरों पर चल रहा है। इंजीनियरों की देखरेख व निरीक्षण के दौरान पाया गया कि नदी में 42 जल स्रोतों के महत्वपूर्ण प्वाइण्ट है। यदि इन प्वाइण्ट्स से सिल्ट हटा दी जाये, तो जलस्रोत फिर से जीवन्त हो जायेंगे और नदी को नया जीवन मिलेगा। ग्रामीणों से मिली जानकारी के आधार पर अब इन प्वाइण्ट्स से सिल्ट हटायी जा रही है। सिल्ट हटते ही एक बार पुन: जल धार फूट पड़ी है, जिसे देखकर इस काम में लगे अफसरो और कर्मियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वहीं यह नदी भी अपने नव जीवन के पथ पर तेजी से अग्रसर हो चली है। फिलहाल, अनुमान लगाया जा रहा है कि काम पूरा होने के बाद नदी एक बार फिर अपने पुराने शबाव पर होगी। इससे न केवल आसपास के खेतों की सिंचाई होगी, तो वहीं जलस्तर भी बढ़ेगा। यही नहीं आसपास के जंगल में मौजूद जानवरों की प्यास बुझायी जा सकेगी। फिलहाल, शासन प्रशासन की इस अनूठी पहल से ओडी नदी को अब जल्द ही नया जीवन मिलने जा रहा है।

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नदी पर बनाये जायेंगे 11 चेकडैम

लघु सिंचाई विभाग द्वारा इस नदी पर 11 चेकडैम बनाये जायेंगे। इस चेकडैम से मदनपुर क्षेत्र के काफी बड़े क्षेत्र में आसानी से फसलों की सिंचाई हो सकेगी। इससे किसानो को लाभ होगा। साथ ही पिछड़े व पठारी क्षेत्र का जलस्तर भी बढ़ेगा।

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जल संकट से मिलेगी निजात

ओडी नदी के जीर्णाेद्धार का काम पूरा हो जाने पर लम्बे समय से सूखे की मार झेल रहे मदनपुर, दिदौनिया व हँसेरा क्षेत्र के गावों का जलस्तर बढ़ जायेगा। आसानी से बरसात के जल का भी संचयन हो सकेगा। यही नहीं इस इलाके के सैकड़ों ऐसे हैण्डपम्पों को भी नया जीवन मिलेगा जो अक्सर ग्रीष्मकाल आते आते पानी छोड़ देते हैं। इससे जल संकट से भी निजात मिलेगी।

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नदी किनारे वृक्षारोपण करेगा वन विभाग

मड़ावरा रेज अन्तर्गत मदनपुर, दिदौनिया, हँसेरा समेत लगभग दो दर्जन छोटे-बड़े गाव व मजरे है, जो ओडी नदी के आसपास बसे हुए है। वन विभाग इस नदी के किनारों पर मनरेगा के तहत वृक्षारोपण करायेगा। मड़ावरा रेज द्वारा यह वृक्षारोपण होगा। जिसमें गुरार, कवा, जामुन, महुआ, आवला, चिरौल, बरगद, पीपल, पाकड़, शीशम आदि पेड़ रोपे जायेंगे। वृक्षारोपण के साथ ही इनकी सिंचाई का प्रबन्ध भी किया जायेगा। देखभाल के लिए कर्मचारी नियुक्त किये जायेंगे। अनुमान के मुताबिक अगस्त के प्रथम सप्ताह में वृक्षारोपण कराया जायेगा।

Posted By: Jagran

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